Rain-Storm Alert: राजस्थान में भीषण गर्मी के बीच मौसम अब करवट लेने जा रहा है। अगले 48 घंटों में प्रदेश के कई जिलों में तेज आंधी और बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं कुछ इलाकों में लू का असर भी जारी रहने की चेतावनी मौसम विभाग ने दी है।
Rajasthan Ka Mausam: राजस्थान में पिछले करीब दो सप्ताह से पड़ रही भीषण गर्मी से अब लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। मौसम केन्द्र जयपुर के अनुसार 22 और 23 मई को प्रदेश में मौसम का मिजाज बदल सकता है। गुरुवार से सक्रिय हुए नए पश्चिमी विक्षोभ के असर से कई जिलों में तेज आंधी और बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग का कहना है कि इस बदलाव के कारण अधिकांश शहरों के तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिलेगी। हालांकि प्रदेश के कुछ इलाकों में मौसम दोहरे असर वाला रहेगा, जहां लू के साथ तेज आंधी और बारिश भी देखने को मिल सकती है।
मौसम विभाग ने झुन्झुनू, चूरू, हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिलों में लू चलने के साथ आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं शुक्रवार को अलवर, भरतपुर, दौसा, डीग, धौलपुर, करौली, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़, बीकानेर और फलोदी में लू को लेकर चेतावनी दी गई है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम अचानक बदल सकता है, इसलिए लोगों को सतर्क रहने और मौसम विभाग की एडवाइजरी का पालन करने की सलाह दी है।
वर्तमान में तेज गर्मी से धरती तप रही है। सड़कों की डामर तक गर्म हो चुकी है और अब लोगों को नौतपा का इंतजार है। 25 मई से सूर्यदेव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष एवं पारंपरिक भारतीय मौसम विज्ञान के अनुसार रोहिणी नक्षत्र के शुरुआती नौ दिन बेहद गर्म माने जाते हैं, जिन्हें “नौतपा” कहा जाता है। मान्यता है कि इन दिनों जितनी अधिक गर्मी और लू चलेगी, वर्षाकाल उतना ही बेहतर रहेगा।
नौतपा को केवल गर्मी का दौर नहीं, बल्कि पर्यावरण और कृषि संतुलन का प्राकृतिक चक्र माना गया है। ग्रामीण परंपराओं और लोक मान्यताओं में इसका विशेष महत्व बताया गया है।
मारवाड़ी लोक कहावत में कहा गया है—
ग्दोए मूसा, दोए कातरा, दोए तिड्डी, दोए ताव।
दोयां रा बादी जळ हरै, दोए बिसर, दोए बाव।।"
अर्थात नौतपा के दौरान यदि तेज गर्मी और लू नहीं चले तो चूहे, फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीट, टिड्डियां और रोग बढ़ने की आशंका रहती है। लोकमान्यता के अनुसार अधिक गर्मी पड़ने से कीट-पतंगों एवं जहरीले जीव-जंतुओं के अंडे नष्ट हो जाते हैं, जिससे प्रकृति का संतुलन बना रहता है।
रोहिणी नक्षत्र को लेकर एक अन्य कहावत भी प्रचलित है—
पैली रोहण जळ हरै, बीजी बोवोतर खायै।
तीजी रोहण तिण खाये, चौथी समदर जायै।।"
इसका आशय है कि रोहिणी नक्षत्र के अलग-अलग चरणों में होने वाली वर्षा का असर खेती, घास और मानसून पर अलग-अलग पड़ता है। चौथे चरण में वर्षा होना अच्छी बारिश का संकेत माना जाता है।
वर्षा की संभावना को लेकर लोक में यह कहावत भी कही जाती है—
रोहण तपै, मिरग बाजै।
आदर अणचिंत्या गाजै।।"
अर्थात यदि रोहिणी नक्षत्र में तेज गर्मी पड़े और मृग नक्षत्र में आंधियां चलें तो आर्द्रा नक्षत्र में अच्छी वर्षा की संभावना बनती है।
विशेषज्ञों के अनुसार नौतपा के दौरान लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। अधिक से अधिक पानी पीना चाहिए तथा तरबूज, खीरा, संतरा जैसे पानी वाले मौसमी फलों का सेवन करना चाहिए। दोपहर में धूप से बचें और आवश्यक होने पर ही बाहर निकलें। बाहर जाते समय छाता, टोपी या तौलिये का उपयोग करना चाहिए।
सतीश व्यास