
Bhanwar Singh Samor : प्रख्यात राजस्थानी साहित्यकार और इतिहासकार डॉ. भंवर सिंह सामौर का शुक्रवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया है। भंवर सिंह सामौर की उम्र 83 वर्ष थी। डॉ. भंवर सिंह सामौर का अंतिम संस्कार पैतृक गांव बोबासर (सुजानगढ़-चूरू) में किया गया जहां वे पंचतत्व में विलीन हो गए। वह चूरू के मूल निवासी थे। मातृभाषा राजस्थानी के प्रति उनका सर्मपण और भाषण-काैशल अद्भुत रहा है। उनके निधन की सूचना के बाद राजस्थानी जनता और साहित्यकार समूह हतप्रभ रह गया है। इलाके में शोक की लहर फैल गई है। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने साहित्य अकादमी के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित राजस्थानी और हिन्दी के बड़े साहित्यकार, संस्कृति मर्मज्ञ भंवर सिंह सामौर के निधन पर गहरा दु:ख व्यक्त किया है।
83 वर्षीय राजस्थानी भाषा के मर्मज्ञ साहित्यकार भंवरसिंह सामौर का जन्म 15 अगस्त 1943 में जिले की सुजानगढ़ तहसील के गांव बोबासर मे हुआ। राजकीय लोहिया कॉलेज में हिन्दी विषय के प्रोफेसर रहे भंवरसिंह सामौर चूरू में अपने मकान में रह रहे थे, वे काफी दिनों से बीमार चल रहे थे। शुक्रवार शाम उनका निधन हो गया। वे राजस्थानी भाषा के शब्दकोष थे। समौर को संस्कृति री सनात दीठ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। राजस्थानी के साथ-साथ हिन्दी में इतिहास, साहित्य के साथ वे सामाजिक सरोकार के संवाहक रहे।
राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने साहित्य अकादमी के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित राजस्थानी और हिन्दी के बड़े साहित्यकार, संस्कृति मर्मज्ञ भंवर सिंह सामौर के निधन पर गहरा दु:ख व्यक्त किया है। राज्यपाल बागडे ने कहा कि भंवर सिंह सामौर का निधन राजस्थानी साहित्य और संस्कृति की अपूरणीय क्षति है। राजस्थानी भाषा और संस्कृति के क्षेत्र का उनका शोधपरक अध्ययन, कोश निर्माण का कार्य और सृजन अनुकरणीय है। राज्यपाल ने ईश्वर से उनकी दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करने, उनके परिजनों को यह दु:ख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की है।