
मौके पर मौजूद संत और ग्रामीण व इनसेट में जांच करती पुलिस। फोटो: पत्रिका
चूरू। सादुलपुर तहसील के गांव नवा की रोही स्थित दुर्गादास आश्रम में साधु की हत्या के मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आश्रम में साधु छेदीलाल (67) उर्फ बाबा सीतारामदास की हत्या के मामले में हरियाणा निवासी सुरेंद्र उर्फ सुमिरणदास उर्फ मोनी बाबा पर आरोप लगाया गया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी घटना के बाद से फरार है। जिसकी तलाश जारी है।
दर्ज मामले में आश्रम के महंत बाबा पूर्णदास (43) पुत्र लक्ष्मीनारायण, निवासी गांव नवा हाल निवासी दुर्गा कॉलोनी, भिवानी (हरियाणा) ने बताया कि उन्होंने बचपन से ही संन्यास जीवन अपना लिया था और वे बाबा दुर्गादास के शिष्य है। वर्ष 2018 में उन्होंने ग्रामीणों के सहयोग से गांव नवा की रोही में गुरु बाबा दुर्गादास के आश्रम का निर्माण करवाया था। वे आश्रम की देखरेख करते हैं।
दर्ज मामले में बताया कि जनवरी 2026 से उनके शिष्य छेदीलाल पुत्र गोकुल, निवासी लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश, आश्रम में रहकर देखभाल कर रहे थे। उन्हें बाबा सीतारामदास के नाम से भी जाना जाता था। वहीं, हरियाणा के गोकुलपुरा निवासी सुरेंद्र उर्फ सुमिरणदास उर्फ मोनी बाबा का भी आश्रम में आना-जाना रहता था।
बाबा पूर्णदास ने रिपोर्ट में बताया कि 29 अक्टूबर की सुबह करीब 11 बजे गांव नवा निवासी अजय कुमार उर्फ राजेश ने फोन कर सूचना दी कि आश्रम में बाबा सीतारामदास की हत्या हो गई है। सूचना मिलने पर वे आश्रम पहुंचे और घटनाक्रम की जानकारी जुटाई। दर्ज मामले में अजय कुमार के हवाले से बताया गया कि मोनी बाबा 28 अक्टूबर को आश्रम आया था और रात वहीं रुका था। अजय के अनुसार, वह सुबह करीब 8 बजे दोनों साधुओं को चाय पिलाकर गया था।
शिकायत के अनुसार, मालकास निवासी एवं वर्तमान में गुड़ान में रहने वाले रोहताश जाट ने बताया कि वह सुबह करीब 8:30 से 8:45 बजे के बीच दूध लेकर आश्रम पहुंचा था। उस समय आश्रम में कोई नहीं था। वह दूध रखकर गांव नवा चला गया। करीब आधे घंटे बाद जब आश्रम की ओर आ रहा था, तब रास्ते में उसे मोनी बाबा तेजी से जाते मिला। शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपी ने कई दिनों से मौनव्रत धारण कर रखा था, इसलिए रोहताश ने उससे कोई बातचीत नहीं की। आश्रम पहुंचने पर रोहताश ने बाबा सीतारामदास को मृत अवस्था में पड़ा देखा। उनके सिर से खून निकल रहा था।
रिपोर्ट में नवा निवासी शेरसिंह पुत्र जगदीश प्रसाद शर्मा के कथन का भी उल्लेख किया गया है। शेरसिंह के अनुसार मोनी बाबा नवा बस स्टैंड से उसके साथ वाहन में बैठा था और काफी घबराया हुआ दिखाई दे रहा था। इन परिस्थितियों के आधार पर बाबा पूर्णदास ने मोनी बाबा पर बाबा सीतारामदास की हत्या करने का संदेह जताते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग की।
Updated on:
30 Oct 2026, 11:59 AM IST
Published on:
30 Oct 2026, 11:59 AM IST
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