Bakra Eid 2026: राजस्थान की सुजानगढ़ बकरी मंडी इन दिनों भारी खरीद-फरोख्त के चलते सुर्खियों में है। यहां ‘शाहरूख’ नाम का बकरा 1.35 लाख रुपए में बिका जबकि 160 किलो वजन वाले बकरों ने लोगों का ध्यान खींचा।
Sujangarh Bakra Mandi: राजस्थान में अपनी अलग पहचान रखने वाली सुजानगढ़ की बकरा मंडी इन दिनों खूब गुलजार है। मंडी में सोमवार को 'शाहरूख' नामक बकरा आकर्षण का केंद्र बना रहा, जो एक लाख 35 हजार रुपए में बिका। वहीं स्थानीय दो बकरों की जोड़ी को सुजानगढ़ निवासी फारूक खीची ने एक लाख 80 हजार रुपए में खरीदा। बंगाली बाबा तकिए के चार बीघा परिसर में लग रही इस मंडी में अब तक करीब 1200 बकरों की खरीद-फरोख्त हो चुकी है। अगले दो दिनों में 300 से 400 और बकरों की बिक्री होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
मंडी में नागौर, डीडवाना, नोखा, फतेहपुर, बीदासर, सांडवा और लूणकरणसर सहित कई क्षेत्रों से पशुपालक और व्यापारी अपने बकरे व मेढ़े लेकर पहुंच रहे हैं। सोमवार को ही लूणकरणसर से करीब 80 बकरे बिक्री के लिए मंडी में लाए गए। पशुपालकों का कहना है कि सुजानगढ़ मंडी में बकरों के अच्छे दाम मिलते हैं, इसलिए यहां दूर-दराज के लोग भी पहुंचते हैं। इसके अलावा यहां लगातार बढ़ती मांग के कारण व्यापार में भी तेजी देखने को मिल रही है और खरीदारों की संख्या में हर दिन इजाफा हो रहा है।
काजियान कमेटी के सचिव इलमूद्दीन अगवान ने बताया कि “शाहरूख” नामक बकरे का वजन करीब 160 किलो, ऊंचाई तीन फुट और रंग बेहद आकर्षक था। इसी कारण उसे ऊंची कीमत मिली। मंडी में बड़े और खूबसूरत बकरों को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है। साथ ही खरीदार विभिन्न बकरों की बोली लगाकर अपने पसंदीदा पशु खरीद रहे हैं, जिससे मंडी में रौनक बनी हुई है और व्यापारियों में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।
काजियान कमेटी की ओर से खरीद-फरोख्त के लिए आने वाले सैकड़ों लोगों के लिए पानी, बिजली, टेंट और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। साथ ही साफ-सफाई, बैठने की उचित व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। कमेटी अध्यक्ष मुमताज अगवान और मास्टर दाऊद काजी व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी कर रहे हैं। मंडी में खरीद-फरोख्त के लिए पुराने अनुभवी दलाल भी सक्रिय हैं, जिनके माध्यम से क्रेता और विक्रेता के बीच सौदे तय हो रहे हैं। इसके अलावा आने वाले व्यापारियों के लिए अस्थायी विश्राम स्थल भी बनाए गए हैं, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो।