Abhishek Sharma reveals: T20 वर्ल्ड कप फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ महज 18 गेंदों पर अर्धशतक जड़ने वाले अभिषेक शर्मा ने अपनी पारी को लेकर बड़ा दिलचस्प खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि वह जिस बैट से खेले, दरअसल वह उनका नहीं शिवम दुबे का था।
Abhishek Sharma reveals: टी20 वर्ल्ड कप 2026 में ज्यादातर समय अभिषेक शर्मा लगातार खराब फॉर्म से जूझ रहे थे। लगातार तीन बार डक उसके बाद कुछ छोटे स्कोर और हर मैच के साथ सवाल बढ़ते जा रहे थे। वह बुरी तरह आउट ऑफ फॉर्म लग रहे थे। इस कारण वह आलोचकों के निशाने पर भी आ गए। सुनील गावस्कर ने तो उन्हें फाइनल से बाहर करने की मांग भी की, लेकिन न्यूजीलैंड के खिलाफ फाइनल के लिए टीम मैनेजमेंट ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया। जहां उन्होंने भारत को खिताब जिताने में बेहद अहम भूमिका निभाई। इसके लिए उन्हें एक टोटका भी करना पड़ा, जिसका खुलासा उन्होंने खुद किया है।
अभिषेक शर्मा ने रविवार रात नरेंद्र मोदी स्टेडियम में लगभग एक लाख फैंस के सामने कहानी पलट दी। बाएं हाथ के इस खिलाड़ी ने सिर्फ 21 गेंदों पर 52 रन की जबरदस्त पारी खेली और सिर्फ 18 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया। उनके बल्ले से छह चौके और तीन छक्के निकले, जिससे उन्होंने संजू सैमसन के साथ मिलकर भारत को जबरदस्त शुरुआत दिलाई। पावरप्ले में भारत की 96 रन की शुरुआती पारी टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास में सबसे ज्यादा पावरप्ले टोटल की बराबरी कर गई।
टी20 वर्ल्ड कप के फाइनल में क्रीज पर उतरने से पहले अभिषक ने एक टोटका किया था। दरअसल, उन्होंने जो बल्ला इस्तेमाल किया, वह उनका नहीं था। वह शिवम दुबे का बल्ला लेकर मैदान पर उतरे थे। मैच के बाद अभिषेक ने बताया कि मैंने शिवम दुबे के बल्ले से बैटिंग की। इसलिए धन्यवाद दुबे। सुबह मुझे कुछ अलग करने का मन हुआ। शुभमन गिल आसपास नहीं थे, इसलिए मैं दुबे के पास गया और उनका बल्ला उठाया।
ज्ञात हो कि शुभमन गिल वर्ल्ड कप से पहले आखिरी सीरीज तक भारत के टी20 उपकप्तान थे। बल्ले से लंबे समय तक खराब फॉर्म के कारण उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया था। उनके बाहर होने के बाद संजू सैमसन और ईशान किशन जैसे खिलाड़ियों के लिए टीम इंडिया का दरवाजा खुल गया, दोनों ने इस टूर्नामेंट के दौरान मौकों का भरपूर फायदा उठाया है।
फाइनल में अभिषेक की पारी में भी शुरू में सब्र का संकेत था। ग्लेन फिलिप्स के ख़िलाफ उनकी पहली गेंद पर उन्होंने शांत फ़ॉरवर्ड डिफ़ेंस किया, यह इस बात का संकेत था कि वह अटैक करने से पहले थोड़ा समय लेना चाहते थे। एक बार जब वह पिच के साथ सहज महसूस करने लगे तो स्ट्रोक्स का फ्लो तेज हो गया।
टूर्नामेंट में अपने मुश्किल दौर के बारे में बात करते हुए अभिषेक ने माना कि लगभग डेढ़ साल तक ड्रीम रन बनाने के बाद मैं पिछले एक महीने से इस फेज से जूझ रहा हूं। ऐसी स्थितियों में एक चीज बहुत मायने रखती है कि आप किसका साथ देते हैं। अगर आपके आसपास के लोग आपको बेहतर बनने में मदद करना चाहते हैं तो इससे बहुत फर्क पड़ता है। जब मैं बल्ले से योगदान नहीं दे रहा था, तब भी टीम में सभी को मुझ पर विश्वास था। वे कहते रहे, ‘वह कर देगा’।