
BCCI strict fitness standards: टीम इंडिया के खिलाड़ियों के बार-बार चोटिल होने और और फिटनेस मानकों में मनमानी से परेशान भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) अब सख्ती बरतने जा रहा है। रिपोर्ट अनुसार, बोर्ड सचिव देवजीत सैकिया भारतीय टीम के फिजियो कमलेश जैन को साफ निर्देश दिए हैं कि चाहे खिलाड़ी कोई भी हो, अगर वह पूरी तरह से फिट नहीं है और कहीं कुछ कमी है, तो तत्काल रिपोर्ट की जाए। बोर्ड ने यह फैसला हाल ही में कई स्टार खिलाड़ियों के अहम मैचों से बाहर होने के चलते लिया है।
टीओआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में कुछ सीनियर प्लेयर्स को सहूलियत देते हुए फिटनेस के अलग-अलग पैमाने तय करने का खुलासा हुआ है। आरोप है कि सीनियर्स और कुछ बड़े कद वाले खिलाड़ियों को पास कराने के लिए बेहद आसान पैरामीटर्स दिए जा रहे थे। पिछले साल सोहम देसाई की जगह एड्रियन ले रूक्स के स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच बनने के बाद यो-यो टेस्ट के स्थान पर ब्रोंको टेस्ट को फिटनेस मानक टेस्ट बना दिया गया, जिसके बाद असल समस्या शुरू हुई।
रिपोर्ट की मानें तो बीसीसीआई की मेडिकल टीम खिलाड़ियों की फिटनेस का आकलन करने के लिए तालमेल बिठाने में संघर्ष कर रही है। ब्रोंको टेस्ट का अब तक कोई बेस पैरामीटर नहीं है। इसलिए आयरलैंड और इंग्लैंड के व्हाइट-बॉल टूर में खराब प्रदर्शन के बाद मेडिकल टीम ने फिट घोषित करने के लिए अलग-अलग ड्रिल पूरी करने के लिए 5.15-5.20 मिनट का बेस फिगर तय किया है।
इससे पहले बेसिक यो-यो टेस्ट पास करने के लिए 16.5 मिनट का मार्कर तय किया था। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने 2 किलोमीटर रनिंग टेस्ट पूरा करने के लिए भी 9-10 मिनट का मार्क तय किया है, जिसे 2के टेस्ट के नाम से जाना जाता है।
बीसीसीआई के एक सूत्र के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय खिलाड़ियों को ब्रोंको टेस्ट की आदत नहीं है। पिछले साल खिलाड़ियों के लिए अलग-अलग बेस पैरामीटर तय किए थे। अब यह सामने आया है कि कुछ सीनियर खिलाड़ियों को फिटनेस टेस्ट पास करने के लिए काफी आसान टारगेट दिए गए थे। सीईओ स्टाफ ने हर्षित राणा और नीतीश कुमार रेड्डी जैसे खिलाड़ियों को भी पास किया था, ताकि यह पक्का हो सके कि टीम मैनेजमेंट की जरूरतों के हिसाब से खिलाड़ी मिल रहे हैं।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि टीम मैनेजमेंट और बोर्ड सचिव की लीडरशिप में टीम इंडिया के फिजियो कमलेश जैन से बार-बार फिटनेस स्टैंडर्ड में गिरावट के लिए पूछताछ की है। टीम मैनेजमेंट इस बात से भी खुश नहीं है कि इंग्लैंड के अच्छे मौसम में भी खिलाड़ियों को इतनी बार ऐंठन हो रही थी। कमलेश से कहा गया है कि उन्हें किसी खिलाड़ी के कद की चिंता नहीं करनी और जो भी उन्हें ठीक न लगे, उसे मार्क नहीं करना चाहिए।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस जसप्रीत बुमराह को तैयार करने में फेल रहा, जबकि सिलेक्टर्स और टीम मैनेजमेंट को भरोसा दिलाया गया था कि वह 15 अगस्त को श्रीलंका में होने वाले पहले टेस्ट के लिए फिट हो जाएगा। वहीं, हर्षित राणा के मामले में सीईओ के लिए शर्मिंदगी की बात रही है, क्योंकि वह घुटने की चोट से ठीक हुआ था और जरूरी फिटनेस लेवल के बारे में कोई साफ मैसेज नहीं दिया गया था। रिपोर्ट की मानें तो राणा को गंभीर क्रैंप्स हुए थे, न कि कोई चोट लगी थी, जब उन्हें तीसरे टी20 के बाद इंग्लैंड से सीईओ वापस भेजा गया था। यह कहा गया था कि उनका वजन ज्यादा था।
सूत्र के हवाले से आगे कहा गया है कि टीम इंडिया मैनेजमेंट ने बताया था कि उनका वजन चार किलो ज्यादा है। ऐसे में सीईओ को और ज्यादा सावधान रहना चाहिए था। अब सीईओ स्टाफ ने उनसे कहा है कि उनका वजन 96 किलो से ज्यादा नहीं हो सकता। हालांकि अब उनका वजन 94 किलो है और अगले हफ्ते उनके ठीक होने की उम्मीद है। लेकिन, जब उन्हें यूके टूर के लिए टीम में चुने जाने की मंज़ूरी मिली थी, तब उनका वजन 97 किलो था।