मिलिए इटली के क्रिशन कालुगामेज से, जो रेस्टोरेंट में पिज्जा बनाने के साथ-साथ टी20 वर्ल्ड कप में विकेट भी चटका रहे हैं। एक पिज्जा मेकर के वर्ल्ड कप स्टार बनने की अनोखी दास्तां...
Crishan Kalugamag, Pizza Man: क्रिकेट के मैदान पर कई संघर्षों की कहानियां सुनी हैं, लेकिन इटली के क्रिशन कालुगामेज की कहानी सबसे अलग है। जब क्रिशन मैदान पर अपनी लेग-स्पिन से बल्लेबाजों को नहीं फंसा रहे होते, तब वह इटली के लुक्का (Lucca) शहर की एक पिज्जारिया में पिज्जा बना रहे होते हैं।
क्रिशन का जन्म श्रीलंका के नेगोम्बो में हुआ था। बचपन से ही उन्हें क्रिकेट का जुनून था। जब वह 16 साल के थे, तब 2007 में उनके माता-पिता ने काम के सिलसिले में इटली में शिफ्ट कर लिया। क्रिशन का दिल टूट गया क्योंकि उन्हें लगा कि अब उनका क्रिकेटर बनने का सपना कभी पूरा नहीं होगा। इटली में क्रिकेट का कोई खास नाम-निशान नहीं था, इसलिए उन्होंने शुरुआत में एथलेटिक्स और टेनिस-बॉल क्रिकेट का सहारा लिया।
क्रिशन ने अपने करियर की शुरुआत एक तेज गेंदबाज के रूप में की थी। साथ ही वह श्रीलंका के घरेलू क्रिकेट में भी खेले थे। लेकिन लगातार चोटों की वजह से 2021 में उन्होंने वापस लेग-स्पिन की तरफ रुख किया। यह फैसला उनके लिए वरदान साबित हुआ।
वर्ल्ड कप की तैयारी के लिए वह श्रीलंका गए और वहां नेट बॉलर के रूप में दिग्गज वानिंदु हसरंगा से टिप्स लिए। उन्होंने दुबई में राशिद खान से भी गूगली फेंकना सीखा। आयरलैंड के खिलाफ इटली की पहली टी20 जीत में क्रिशन ने 3 विकेट लेकर अपनी काबिलियत साबित की थी।
क्रिशन के लिए क्रिकेट खेलना आसान नहीं रहा। टूर्नामेंट के लिए छुट्टी न मिलने के कारण उन्हें कई नौकरियां छोड़नी पड़ीं। सोमवार से शनिवार वो La Vita पिज्जेरिया में काम करते हैं। रविवार की सुबह जल्दी रोम के लिए निकलते हैं ताकि ट्रेनिंग कर सकें और रात को देर से वापस लौटते हैं।
इटली में फुटबॉल सबसे लोकप्रिय है, और क्रिशन खुद इंटर मिलान के बहुत बड़े फैन हैं। दिलचस्प बात यह है कि इटली के महान फुटबॉलर पिरलो (Andrea Pirlo) और विएरी (Christian Vieri) ने भी इटली की क्रिकेट टीम को वर्ल्ड कप के लिए शुभकामनाएं दी हैं। क्रिशन का कहना है कि जब वह विकेट लेते हैं, तो वह अपने पसंदीदा फुटबॉलर लौतारो मार्टिनेज की तरह जश्न मनाना चाहते हैं। 34 साल की उम्र में वर्ल्ड कप खेलना क्रिशन के लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। वह चाहते हैं कि वह आने वाली पीढ़ी के लिए एक मिसाल बनें ताकि भविष्य के खिलाड़ियों को उनकी तरह संघर्ष न करना पड़े।