
नई दिल्ली। फिरोजशाह कोटला मैदान का गेट नंबर दो अब सहवाग गेट के नाम से जाना जाएगा। दिल्ली से निकल कर पूरी दूनिया में अपनी बल्लेबाजी के दम पर नाम कमाने वाले सहवाग को दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ की ओर से यह सौगात आज मिली। इस सम्मान से सहवाग काफी खुश दिखें। लेकिन कार्यक्रम में दिल्ली क्रिकेट संघ की एक चूक ने बड़ी लापरवाही को सामने ला दी। दरअसल कोटला मैदान की रंग-रोहित दिवार पर सहवाग के बारे में कई अहम बातें लिखी गई हैं। इसमें सहवाग के सभी रिकॉर्डों का जिक्र किया गया है। लेकिन इन्हीं रिकॉर्डों के बीच डीडीसीए सहवाग को टेस्ट में ट्रिपल सेंचुरी बनाने वाले एक मात्र भारतीय खिलाड़ी बताया। जबकि टीम इंडिया के लिए यही कारनामा करुण नायर भी कर चुके हैं।
नायर ने 2016 में बनाया था
नायर टेस्ट में ट्रिपल सेंचुरी लगाने वाले भारत के दूसरे बल्लेबाज है। उन्होंने साल 2016 में इंग्लैंड के खिलाफ यह पारी खेली थी। दिल्ली क्रिकेट संघ की ओर से हुए इस लापरवाही पर क्रिकेट बोर्डों की लचर व्यवस्था का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
सहवाग ने बताया बड़ी उपलब्धि
वीरू ने कहा कि यह मेरे लिए यह बहुत बड़ा सम्मान है कि कोटला के एक गेट का नाम मुझपर रखा गया है। यह वही मैदान है, जहां से मैंने अपने जीवन का सफर शुरू किया था। मुझे आज भी याद है जब मैंने अपने करियर की शुरूआत की थी तो मैं रोजाना इसी गेट से होकर गुजरता था और आज इस गेट का नाम मेरे नाम पर रखा गया है। मेरे लिये इससे बड़ा सम्मान कोई और नहीं हो सकता।
दिल्ली के पहले क्रिकेटर बने सहवाग
स्टेडियम का गेट अपने नाम पर होने का गौरव पाने वाले सहवाग दिल्ली के पहले क्रिकेटर हैं। टेस्ट क्रिकेट में दो तिहरे शतक और वनडे में दोहरा शतक लगाने वाले एकमात्र बल्लेबाज सहवाग ने कहा कि इस राज्य से और भी क्रिकेटर आएंगे जिनके नाम पर स्टैंड, गेट और पवेलियन होंगे। लेकिन मुझे खुशी है कि मैं दिल्ली से पहला क्रिकेटर हूं जिसके नाम पर गेट का नाम रखा गया है। मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं और इस सम्मान के लिये डीडीसीए को धन्यवाद देना चाहता हूं।
युवाओं को करेगा प्रेरित
नजफगढ़ के नवाब के नाम से मशहूर सहवाग ने साथ ही कहा कि यह गेट राजधानी के युवा क्रिकेटरों को प्रेरित करने का काम करेगा। उन्होंने कहा कि कोई भी युवा क्रिकेटर इस गेट पर इस नाम को पढ़कर प्रेरित होगा। सहवाग यहां एक बच्चे के रूप में खेला था और जब उसने खेलना छोड़ा तो उसके नाम पर गेट का नाम रख दिया गया। मुझे लगता है कि यही बात युवाओं को प्रेरित करेगी कि हम भी कुछ कर सकते हैं। उन्होंने कहा जब मैं दिल्ली के लिये अंडर-16, अंडर-19, अंडर-23 या रणजी खेलने के बाद भारत का प्रतिनिधित्व कर सकता हूं और फिर इसी गेट, स्टैंड या किसी अन्य चीज का नाम मेरे नाम पर रखा जाता है तो यह प्रेरणा की ही बात हो सकती है।