आरएस अंब्रिश ने अंडर-19 वर्ल्ड कप में सीम ऑलराउंडर के रूप में अपनी पहचान बनाई है। पिता की कोचिंग से शुरुआत करके उन्होंने बड़े स्तर पर खुद की पहचान बनाई है और अपने पिता का क्रिकेट खेलने का सपना साकार किया है।
RS Ambrish Story: आईसीसी अंडर-19 क्रिकेट वर्ल्ड कप में भारतीय टीम काफी मजबूत नजर आ रही है। लीग स्टेज में अपने तीनों मैच जीतकर भारत ने ग्रुप में टॉप पर रहकर सुपर-6 के लिए क्वालिफाई किया है। अपने तीसरे मैच में भारत ने न्यूजीलैंड को 7 विकेट से करारी मात दी और इस जीत के हीरो रहे पेस बॉलिंग ऑलराउंडर आरएस अंब्रिश, जिन्होंने 8 ओवर में मात्र 29 रन देकर 4 महत्वपूर्ण विकेट झटके।
आरएस अंब्रिश का उभरना भारतीय क्रिकेट में पेस बॉलिंग ऑलराउंडर की कमी को पूरा करता दिख रहा है। अंब्रिश ने न केवल गेंद से बल्कि जरूरत पड़ने पर बल्ले से भी टीम इंडिया को मजबूती दी है और अपने पिता के अधूरे क्रिकेट सपने को नई दिशा दी है। आइए जानते हैं भारतीय क्रिकेट में इस उभरते ऑलराउंडर की कहानी।
भारतीय टीम की बल्लेबाजी हमेशा चर्चा में रहती है, लेकिन सीम ऑलराउंडर के विकल्प सीमित रहे हैं। अंडर-19 वर्ल्ड कप में आरएस अंब्रिश ने इस खाली जगह को भरने का भरोसा जगाया है। वह नई गेंद से तेज गेंदबाजी करने की क्षमता रखते हैं और कठिन परिस्थितियों में विकेट निकाल सकते हैं। इंग्लैंड दौरे पर संयुक्त रूप से सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले अंब्रिश को फर्स्ट चेंज गेंदबाज के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है। न्यूजीलैंड के खिलाफ हुए मैच में भी उन्होंने अपनी इसी क्षमता का प्रदर्शन किया।
अंब्रिश के पिता सुकुमार खुद कोच हैं और उन्होंने अंब्रिश की ट्रेनिंग 5 वर्ष की आयु से ही शुरू कर दी थी। पांच साल की उम्र में क्रिकेट एकेडमी में दाखिला और कम उम्र में सीनियर खिलाड़ियों के खिलाफ खेलना उनके आत्मविश्वास को मजबूत करता गया। स्कूल स्तर पर उन्होंने एथलेटिक्स में भी मेडल जीते, लेकिन अंब्रिश का झुकाव हमेशा क्रिकेट की ओर रहा।
अंब्रिश के पिता एज-ग्रुप क्रिकेट में राज्य के लिए खेले हैं, लेकिन उन्हें कभी एक्सपोजर नहीं मिल पाया। लेकिन अपने पिता के बड़े स्तर पर क्रिकेट खेलने के इसी सपने को अब अंब्रिश पूरा कर रहे हैं। सुकुमार के पास अवसरों की कमी थी, लेकिन अंब्रिश के पास अभी काफी समय है और कई मौके भी।
वर्ल्ड कप से पहले अंब्रिश को साइड स्ट्रेन की समस्या हुई, जिसके कारण वह एशिया कप से बाहर रहे। इसके बावजूद चयनकर्ताओं ने उन पर भरोसा बनाए रखा और वर्ल्ड कप स्क्वाड में शामिल किया। फिटनेस और स्ट्रेंथ कंडीशनिंग पर विशेष ध्यान देते हुए उन्होंने वापसी की। उन्होंने भी इस फैसले को सही साबित करते हुए अपने प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया।