
नई दिल्ली : टीम इंडिया (Team India) में जब यो-यो टेस्ट (YO-YO Test) अनिवार्य किया गया तो शुरुआत में फिटनेस का यह स्तर पाने में खिलाड़ियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था। यो-यो टेस्ट पास न कर पाने के कारण अंबाती रायडू (Ambati Rayudu) इंग्लैंड दौरे (England Tour) पर जाने वाली भारतीय टीम से बाहर कर दिए गए थे। इस कारण विराट कोहली (Virat Kohli) और टीम मैनेजमेंट (Team Management) की काफी आलोचना की गई थी। लेकिन तब से लेकर अब तक यो-यो टेस्ट जारी है और अब इसे लेकर खिलाड़ियों को असुविधा भी नहीं होती है। आधुनिक क्रिकेट में फिटनेस के महत्व पर विचार रखते हुए टीम इंडिया के मध्यक्रम के पूर्व बल्लेबाज मोहम्मद कैफ (Mohammad Kaif) ने कहा था कि अगर उनके जमाने में यो-यो टेस्ट अनिवार्य होता तो सिर्फ वह, युवराज सिंह (Yuvraj Singh) और लक्ष्मीपति बालाजी (Laxmipati Balaji) ही इसे पास कर पाते। कैफ के साथ खेल चुके इरफान पठान (Irfan Pathan) ने इस पर जवाब देते हुए कहा है कि तो फिर वह क्या करते। हम चने बेच रहे थे।
कैफ अपने समय के सर्वश्रेष्ठ क्षेत्ररक्षकों में से एक थे
कैफ की इस बात पर हंस कर मजे लेते हुए इरफान पठान ने कहा कि उन्होंने कैफ की बातें सुनी। कैफ के हिसाब से यो-यो टेस्ट होता तो सिर्फ तीन खिलाड़ी ही उसे पास कर पाते, तो फिर हम क्या कर रहे थे। चने बेच रहे थे हम। इसके आगे उन्होंने कहा कि आपने 16 की औसत से रन बनाए हैं तो उन्होंने 15.5 की औसत से। बता दें कि 2000 के दशक में मोहम्मद कैफ और युवराज सिंह टीम इंडिया के सर्वश्रेष्ठ क्षेत्ररक्षक थे। इन दोनों क्षेत्ररक्षण में जो बेंचमार्क सेट किया था, उसे सुरेश रैना, रविंद्र जडेजा और विराट कोहली जैसे खिलाड़ियों ने आगे बढ़ाया और अब टीम इंडिया को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ क्षेत्ररक्षक टीम के तौर पर देखा जाता है।
दादा उतने ही अंक लाते थे, जितने जरूरी थे
इस मौके पर इरफान पठान ने कहा कि टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के अध्यक्ष सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) भी फिटनेस टेस्ट पास किया करते थे। वह तब उतने ही नंबर लाते थे, जितना पास होने के लिए जरूरी होते थे। पठान ने कहा कि उन्हें याद है कि दादा पास करने के लिए जरूरी 12 अंक ही लाते थे।