Happy birthday Kapil Dev: भारतीय टीम को पहली बार वर्ल्ड कप जिताने वाले कप्तान, दिग्गज ऑलराउंडर कपिल देव 6 जनवरी यानी आज अपना 67वां जन्मदिन मनाने जा रहे हैं। भारतीय क्रिकेट के साथ ही विश्व क्रिकेट में उनके योगदान से कपिल देव सभी के दिलों में बस गए हैं।
Kapil Dev Birthday Special: भारत ने विश्व क्रिकेट को ऐसे कई खिलाड़ी दिए हैं, जिनका नाम पूरी दुनिया गर्व से लेती है। ऐसे ही खिलाड़ियों में एक नाम आता है, भारतीय टीम के पूर्व कप्तान कपिल देव का। क्रिकेट में उनका योगदान और विशेषकर भारतीय क्रिकेट में उनकी छाप आज भी अमिट है। भारत को अपनी कप्तानी में पहला वर्ल्ड कप जिताने वाले कपिल देव का नाम विश्व के सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर्स में लिया जाता है। उनका कभी न हार मानने वाला जज़्बा ही उन्हें इतना महान बनाता है। आज यानी 6 जनवरी को कपिल देव अपना 67वां जन्मदिन मनाएंगे। इसी मौके पर आइए देखते हैं उनकी ज़िंदगी से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें और उनका भारत और विश्व क्रिकेट को योगदान।
बंटवारे के बाद कपिल देव का परिवार चंडीगढ़ आ गया था। एक साधारण परिवार में जन्मे कपिल देव ने अपनी मेहनत के दम पर क्रिकेट की दुनिया में कदम रखा। इसी के चलते उन्हें 1975 में घरेलू क्रिकेट में खेलने का मौका मिला। हरियाणा के लिए पंजाब के खिलाफ खेलते हुए कपिल देव ने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। गेंदबाजी में अपनी धार और अलग एक्शन से बल्लेबाजों को छका देने की क्षमता और बल्लेबाजी में भी मिडल ऑर्डर में तेज गति से रन बटोरने की ताकत के चलते उन्हें जल्द ही भारतीय टीम में जगह मिल गई। साल 1978 में उन्हें पाकिस्तान टूर के लिए टीम में शामिल किया गया। गेंदबाजी में उनकी आउटस्विंगर डालने की क्षमता अद्वितीय थी। समय के साथ वह भारत के प्रीमियर तेज गेंदबाज बनकर उभरे।
कपिल देव अपने डेब्यू के पांच साल के अंदर ही भारतीय टीम के कप्तान बन गए। 1983 के वर्ल्ड कप कैंपेन के लिए भी उन्हें टीम का कप्तान नियुक्त किया गया। उस समय भारतीय टीम को अंडरडॉग समझा जाता था। लेकिन उस टूर्नामेंट में भारत ने ऐसा कारनामा कर दिखाया कि सारी दुनिया हैरान रह गई। भारत ने वेस्टइंडीज का विजयी रथ रोकते हुए वर्ल्ड कप को अपने नाम कर इतिहास रच दिया। इसी के साथ ही कपिल देव वर्ल्ड कप जीतने वाले सबसे युवा कप्तान बन गए। यह रिकॉर्ड अब भी उन्हीं के नाम है। भारत के वर्ल्ड कप जीतने में भी कपिल देव की भूमिका अहम रही। गेंदबाजी में उन्होंने 8 पारियों में 12 विकेट झटके थे। इसी के साथ ही बल्लेबाजी में भी उन्होंने 8 पारियों में 60.60 की औसत और 108.99 की स्ट्राइक रेट से 303 रन बनाए और सर्वाधिक रन बनाने के मामले में पांचवें स्थान पर रहे। उनका यही ऑलराउंड प्रदर्शन भारत को विश्व चैंपियन बनाने में महत्वपूर्ण रहा। ज़िम्बाब्वे के खिलाफ उनकी 175 रन की नाबाद पारी आज भी भारतीय फैंस के दिलों में बसी हुई है।
वर्ल्ड कप जीतने वाले सबसे युवा कप्तान होने के साथ ही कपिल देव के नाम ऐसी कई उपलब्धियां हैं, जिन्हें पाना किसी क्रिकेटर के लिए ख्वाब हो सकता है। टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में कपिल देव ही एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं, जिनके नाम 5000 से ज्यादा रन और 400 से अधिक विकेट दर्ज हैं। कपिल देव को कई अवॉर्ड भी मिल चुके हैं, जिनमें 1982 में पद्मश्री, 1991 में पद्म भूषण, 1980 में अर्जुन पुरस्कार, 2002 में विजडन क्रिकेटर ऑफ द सेंचुरी और 2010 में आईसीसी हॉल ऑफ फेम में शामिल किया जाना प्रमुख हैं। इसके अलावा उन्हें कर्नल सी.के. नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड (2013) भी मिला, जो कि क्रिकेट में किसी भारतीय को दिया जाने वाला सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार है।