Mukul Choudhary Untold Story: मुकुल चौधरी राजस्थान के झुंझुनू जिले के एक छोटे से गांव खेदारो की ढाणी के रहने वाले हैं। मुकुल को क्रिकेटर बनाने के लिए उनके पिता दलीप चौधरी ने अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया। यहां तक कि उन्हें जेल भी जाना पड़ा। उनकी कहानी सुन आपकी आंखें भी भर आएंगी।
Mukul Choudhary Untold Story: केकेआर के खिलाफ लगभग हारे हुए मैच में जान डालकर लखनऊ सुपर जायंट्स को अकेले अपने दम पर जिताने वाले मुकुल चौधरी सुर्खियों में हैं। उन्होंने इस जीत को अपने पिता को समर्पित किया है, जिन्होंने अपना सबकुछ त्याग कर बेटे मुकुल में अपने सपने का जिया है। भले ही अब मुकुल चौधरी अब बड़ा नाम बन गए हैं, लेकिन शायद आपको नहीं पता होगा कि उनके पिता ने क्या-क्या नहीं किया है। उन्होंने बेटे को क्रिकेटर बनाने के लिए अपना घर बेचा, लोन लिया, जेल गए और रिश्तेदारों के ताने भी सुने, लेकिन कभी हिम्मत नहीं हारी। उनकी ये दर्दभरी कहानी आपकी आंखों को नम कर देगी।
राजस्थान के झुंझुनू जिले के एक छोटे से गांव खेदारो की ढाणी के रहने वाले दलीप चौधरी ने टीओआई से बातचीत में कहा कि जब लखनऊ सुपर जायंट्स ने मुकुल चौधरी को ऑक्शन में 2.60 करोड़ रुपये में साइन किया, तो उसने सबसे पहले मुझसे कहा कि क्रिकेट के सपने को पूरा करने के लिए लिया गया लोन चुका देंगे।
चौधरी ने याद करते हुए कहा कि जब मैंने 2003 में ग्रेजुएशन किया, तो उसी साल मेरी शादी हुई और मेरा एक सपना था कि अगर मेरा कभी बेटा हुआ तो वह क्रिकेट खेले। अगले साल, मुझे एक बेटा हुआ और बहुत छोटी उम्र से ही मैंने तय कर लिया था कि मैं उसे क्रिकेटर बनाने के लिए सब कुछ करूंगा। जब इतने सारे लोग बनते हैं तो मेरा बेटा क्यों नहीं?
छह साल तक, दलीप चौधरी ने राजस्थान एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस की तैयारी की, लेकिन एग्जाम पास नहीं कर सके। फिर उन्होंने रियल एस्टेट बिजनेस में कदम रखा, वह भी फेल हो गया। 2016 में एक अच्छी क्रिकेट एकेडमी की तलाश में पिता और बेटा घर से करीब 70 किलोमीटर दूर सीकर में एसबीएस क्रिकहब पहुंचे।
दलीप ने बताया कि एक बार जब मैंने उसका एडमिशन करा दिया तो मुझे एहसास हुआ कि मेरे पास काफी पैसे नहीं हैं। मैंने अपना घर बेचने का फैसला किया, क्योंकि मेरी कोई रेगुलर इनकम नहीं थी। मुझे 21 लाख रुपये मिले। मैंने खरीदार से पूरी रकम मेरे अकाउंट में ट्रांसफर करने को कहा, ताकि सब कुछ रिकॉर्ड में रहे। अगले साल मैंने एक होटल शुरू किया और दूसरा लोन लिया। हां, मैं समय पर किश्तें नहीं दे पाया। मैं जेल भी गया, लेकिन मैंने कभी फ्रॉड नहीं किया।
उन्होंने बताया कि मेरे रिश्तेदारों ने मुझे छोड़ दिया। उन्होंने मुझे पागल कहा। वे कहते खुद की जिंदगी बर्बाद कर दी, अब अपने बेटे को तो बख्श दे। ये कुछ ऐसी बातें थीं, जो मेरे मुंह पर कही गईं। इससे मेरा परिवार और मजबूत हो गया। उन कठोर शब्दों ने मेरे इरादे को और भी पक्का कर दिया कि मैं सही रास्ते पर हूं।
बता दें कि दलीप खुद एक क्रिकेटर थे, लेकिन अपने गांव में सिर्फ़ लोकल टूर्नामेंट ही खेलते थे। दलिप ने याद करते हुए बताया कि मेरे लिए कपिल देव और सचिन तेंदुलकर थे। वे बड़े होते हुए मेरे आइडल थे। मैं अपने बेटे के साथ सचिन के वीडियो देखता था, लेकिन 2011 के वनडे वर्ल्ड कप के बाद, जब एमएस धोनी ने विनिंग सिक्स मारा, तो मेरा बेटा धोनी का फैन बन गया और मुझसे पहली बार एक जोड़ी ग्लव्स मांगे थे।