Sachin Tendulkar विश्व के सर्वकालिक महानतम बल्लेबाज माने जाते हैं। इसके वह वनडे के सर्वश्रेष्ठ सलामी बल्लेबाज भी माने जाते हैं, लेकिन ऐसा संयोग से हुआ था।
मुंबई : मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) को न सिर्फ भारत का महानतम बल्लेबाज माना जाता है, बल्कि उन्हें विश्व के सर्वकालिक महानतम बल्लेबाजों में भी शुमार किया जाता है। सचिन ने सीमित ओवर के क्रिकेट में बतौर मध्यक्रम बल्लेबाज अपना करियर शुरू किया था। इसके बावजूद उनकी गिनती विश्व के सर्वश्रेष्ठ सलामी बल्लेबाज के रूप में होती है। उन्हें ओपनिंक का मौका संयोग से मिला था। इसका खुलासा अब उन्होंने अपने एफएम ऐप एमबी 100 पर की है। उन्होंने तत्कालीन कोच कोच अजित वाडेकर और कप्तान मोहम्मद अजरुद्दीन को यह कहकर ओपनिंग करने गए थे कि अगर अगर नहीं चला तो दोबारा ओपनिंग करने की बात नहीं करूंगा।
सिद्धू के चोटिल होने से मिला मौका
टीम इंडिया कीवी दौरे पर थी। मैच के दिन तक सचिन को नहीं मालूम था कि उन्हें ओपनिंग करना है। होटल से निकलकर जब वे ड्रेसिंग रूम में पहुंचे तो यह चर्चा चल रही थी कि नवजोत सिंह सिद्धू की गर्दन में तकलीफ है और वह यह मैच नहीं खेल पाएंगे। इन दोनों ने पूछा कि कौन ओपनिंग कर सकता है तो सचिन ने अपना नाम ही आगे कर दिया। सचिन ने इसका कारण बताते हुए कहा कि उन्हें खुद पर विश्वास था कि वह मैदान पर जाकर आक्रमक बल्लेबाजी करूंगा। तेंदुलकर ने कहा कि उस वक्त तक आमतौर पर बल्लेबाज शुरुआती 15 ओवर तक गेंद के पुराना हो जाने का इंतजार करते थे। इसके बाद आक्रमण करते थे।
कोच और कप्तान ने पूछा क्यों करना चाहते हो ओपनिंग
सचिन ने कहा कि जैसे ही उन्होंने अपना नाम ओपनिंग के लिए आगे बढ़ाया, कप्तान और कोच की पहली प्रतिक्रिया यही थी कि आखिर क्यों सलामी बल्लेबाजी करना चाहते हो। इस पर उन्होंने उन दोनों से यही कहा कि उन्हें खुद पर भरोसा है, अगर वह फेल हो गए तो दोबारा ओपनिंग करने की बात करने नहीं आएंगे।
इसके बाद तो जो हुआ वह इतिहास है
इस मैच में सचिन ने 42 गेंदों में पर 89 रन की धुआंधार पारी खेली। इस पारी के दौरान उन्होंने 15 चौके और दो छक्के लगाए और टीम की जीत की नींव रखी। इससे पहले मैच में भी उन्होंने 49 गेंदों पर 82 रन बनाए थे। इसके बाद तो उनहें दोबारा मौका दिए जाने के बारे में बात करने की जरूरत ही नहीं पड़ी। इसके बाद जब उन्होंने अपना करियर खत्म किया, तब तक 51 शतक और वनडे में सबसे ज्यादा रन बना चुके थे, जो अब तक रिकॉर्ड है।
पहला शतक भी बतौर सलामी बल्लेबाज ही बनाया
बता दें कि सचिन तेंदुलकर इससे पहले बतौर मध्यक्रम बल्लेबाज काफी मैच खेल चुके थे, लेकिन वह एक भी शतक नहीं लगा पाए थे। वनडे करियर का उनका पहला शतक 8वीं पारी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आया था। कोलंबों में सचिन ने अपना पहला शतक लगाया था। बतौर सलामी बल्लेबाज अपना करियर शुरू करने के बाद सचिन ने लागातार पांच पारियों मेकं 82, 63, 40, 63 और 73 रन की अर्धशतकीय पारी खेली।