Sunil Gavaskar on Kavya Maran: काव्या मारन के पाकिस्तानी खिलाड़ी अबरार अहमद को ₹2.5 करोड़ में साइन करने पर सुनील गावस्कर ने चुप्पी तोड़ी है। 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद गावस्कर का यह बयान कि 'पाकिस्तानी खिलाड़ियों की फीस से खरीदे हथियार हमारे सैनिकों की जान लेते हैं', पूरे क्रिकेट जगत में तूफान ले आया है। जानिए क्यों खत्म हो गई भारत-पाक क्रिकेट की दोस्ती।
Sunil Gavaskar on Kavya Maran: हाल ही में काव्या मारन की टीम 'सनराइजर्स लीड्स' (द हंड्रेड) ने पाकिस्तानी खिलाड़ी अबरार अहमद को करीब ₹2.5 करोड़ (£190,000) में साइन करने पर पूरे भारत में बवाल मच गया है। भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव और 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसे युद्ध के हालातों के बावजूद, एक भारतीय मालिक के पाकिस्तानी खिलाड़ी पर करोड़ों लुटाना हर किसी को खटक रहा है। इस पर क्रिकेट जगत के दिग्गज सुनील गावस्कर ने जो लिखा, उसने सबको हिला कर रख दिया है।
गावस्कर ने तीखे शब्दों में कहा कि जब कोई भारतीय मालिक किसी पाकिस्तानी को फीस देता है, तो उसका टैक्स वहां की सरकार के पास जाता है, जिससे खरीदे गए हथियार सरहद पर हमारे सैनिकों की जान लेते हैं। यह बयान इसलिए भी बड़ा है क्योंकि गावस्कर हमेशा से पाकिस्तानी खिलाड़ियों (जैसे बाबर आजम और इमरान खान) के हमदर्द रहे हैं, लेकिन अब उन्होंने साफ कर दिया है कि देश की सुरक्षा के आगे पुराने रिश्तों और खेल के रोमांस की कोई जगह नहीं बची है। अब यह जंग मैदान के साथ-साथ विचारधारा की भी बन चुकी है।
यह वही सुनील गावस्कर हैं जिनके पाकिस्तानी खिलाड़ियों के साथ बहुत दोस्ताना रिश्ते रहे हैं। अभी फरवरी 2025 में ही 'चैंपियंस ट्रॉफी' के दौरान वह वसीम अक्रम और वकार यूनुस के साथ एक पाकिस्तानी टीवी शो पर नजर आए थे। उन्होंने बाबर आजम को बैटिंग टिप्स दिए और कई मौकों पर उनकी तारीफ भी की। इतना ही नहीं, पिछले महीने ही उन्होंने जेल में बंद इमरान खान के हक में बात की थी। जब खबरें आईं कि मेडिकल लापरवाही की वजह से इमरान की एक आंख की रोशनी कम हो रही है, तो गावस्कर ने चिंता जताई थी कि उनके साथ मानवीय व्यवहार होना चाहिए।
गावस्कर के इस बदले हुए रवैये के पीछे की सबसे बड़ी वजह मई में हुआ 'ऑपरेशन सिंदूर' है। इस युद्ध के बाद चीजें पूरी तरह बदल गई हैं। एशिया कप के दौरान भी गावस्कर ने भारतीय टीम के उस फैसले का समर्थन किया था, जिसमें खिलाड़ियों ने पाकिस्तानी टीम से हाथ नहीं मिलाया था।
पाकिस्तान के पूर्व खिलाड़ी जैसे सकलेन मुश्ताक, राशिद लतीफ और कामरान अकमल अक्सर भारतीय टीम की सफलता को लेकर जहर उगलते रहे हैं। लेकिन गावस्कर जैसे सुलझे हुए और शिक्षित दिग्गज का इतना कड़ा रुख अपनाना एक बहुत बड़ी बात है। गावस्कर कोई हंगामा खड़ा करने वाले इंसान नहीं हैं, उन्होंने जो भी लिखा है, बहुत सोच-समझकर लिखा होगा। ऐसा लगता है कि अब भारत और पाकिस्तान के खिलाड़ियों के बीच पुरानी यादें और दोस्ती खत्म हो चुकी है। अब मैदान के अंदर और बाहर, दोनों तरफ यह एक खुली जंग की तरह है।