क्रिकेट

वह किसी से नहीं डरता… भारत को छठा U19 वर्ल्ड कप खिताब जिताने वाले वैभव सूर्यवंशी के पिता का बड़ा बयान

Vaibhav Sooryavanshi: U19 वर्ल्ड कप फाइनल में भारत ने वैभव सूर्यवंशी के महज 80 गेंदों पर 15 चौके और 15 छक्‍कों की मदद से 175 रनों की धमाकेदार पारी के दम पर 100 रनों से शानदार जीत दर्ज की है। वैभव की इस तूफानी पारी के बाद पूरा देश खुशी से झूम उठा। वहीं, सूर्यवंशी […]

2 min read
Feb 07, 2026
भारतीय युवा बल्‍लेबाज वैभव सूर्यवंशी। (फोटो सोर्स: एक्‍स@/BCCI)

Vaibhav Sooryavanshi: U19 वर्ल्ड कप फाइनल में भारत ने वैभव सूर्यवंशी के महज 80 गेंदों पर 15 चौके और 15 छक्‍कों की मदद से 175 रनों की धमाकेदार पारी के दम पर 100 रनों से शानदार जीत दर्ज की है। वैभव की इस तूफानी पारी के बाद पूरा देश खुशी से झूम उठा। वहीं, सूर्यवंशी का परिवार ने जमकर जश्‍न मनाया। मैच के बाद वैभव के पिता संजीव सूर्यवंशी ने उन बुनियादी गुणों के बारे में बताया, जो उनके विचार से एक टीनएजर को ऐसी रात में असामान्य रूप से सहज बनाते हैं, जब ज़्यादातर लोग घबरा जाते हैं। उन्‍होंने कहा कि फाइनल में आपने जो शांति देखी, वह आज नहीं मिली, यह हमेशा से थी।

'वह बिल्कुल भी किसी से नहीं डरता'

संजीव ने बताया कि जब से उसने खेलना शुरू किया है, वह मानसिक रूप से मजबूत बच्चा रहा है। वह बिल्कुल भी किसी से नहीं डरता। थोड़ा भी नहीं। बचपन में भी वह अच्छे गेंदबाजों को बहुत अच्छी तरह से खेलता था। आज भी उसे कोई समस्या नहीं हुई। वह देश के लिए खेल रहा था और आखिर में यह तरीका उसके लिए काम आया। हमारे लिए यह काफी था।

'तकनीक नहीं है, यह डर की कमी'

यह इस बात का सटीक प्रमाण है कि वैभव की फाइनल पारी अलग क्यों लगी? यह सिर्फ बाउंड्री की संख्या या रन बनाने की गति नहीं थी, यह मजबूत मनोबल था। क्‍योंकि फाइनल में कई तरह का दबाव होता है। संजीव ने ओपनर की मानसिकता के बारे में वैभव की तकनीक से ज़्यादा बात की। उनके लिए परिभाषित करने वाली चीज तकनीक नहीं है, यह डर की कमी है।

'तो सिंगल या डबल लेने का क्या फायदा?'

संजीव ने माना कि उन्होंने उसे पारी को कंट्रोल करने का सामान्य तरीका सिखाने की कोशिश की। हम उससे कहते थे कि अगर तुम सिंगल या डबल भी लेते हो तो भी ठीक है। लेकिन वह कहता था कि पापा जब मैं बॉल को सिक्स के लिए मार सकता हूं तो सिंगल या डबल लेने का क्या फायदा?

ब्रायन लारा और युवराज सिंह जैसा बनना चाहता है वैभव

यह दिखाता है कि वैभव ने बचपन से ही हावी होने वाली मानसिकता अपनाई है। संजीव ने यह भी बताया कि वैभव को ब्रायन लारा और युवराज सिंह की बैटिंग के वीडियो देखना पसंद था और वह उन्हें देखकर खुद को वैसा ही बनाने की कोशिश करता था। उन्होंने बताया कि कैसे उनकी बातों ने वैभव को आत्मविश्वास के साथ मैदान पर जाने और बड़े दिन अपना बेस्ट देने का भरोसा दिलाया।

Updated on:
07 Feb 2026 05:29 pm
Published on:
07 Feb 2026 08:03 am
Also Read
View All

अगली खबर