
नई दिल्ली। पिछले कुछ महीनों से बिहार की चर्चा ज्यादातर अपराध से जुड़ी संगीन वारदातों के कारण हुई है। लोगों के जेहन के बिहार को लेकर वहीं पुरानी "जंगलराज वाली" छवि बनती जा रही है। मुजफ्फपुर शेल्टर होम में लड़कियों के साथ दुष्कर्म, सांसद पप्पू यादव की पिटाई, पूर्व मेयर समीर कुमार की हत्या, गंगा किनारे महिला से बलात्कार जैसी घटनाओं ने बिहार की विकास वाली इमेज को गहरा अघात पहुंचाया है। जिस तरीके से बिहार में क्राइम रेट बढ़ा है, वो चिंतनीय है। इन घटनाओं से इतर 17 साल बाद वापसी कर रहे बिहार क्रिकेट टीम ने विजय हजारे ट्रॉफी में काबिल-ए-तारीफ प्रदर्शन किया है।
बिहार क्रिकेट टीम का जलवा-
मान्यता छिन जाने की वजह से बिहार की टीम पिछले 17 साल से भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की टूर्नामेंटों में भाग नहीं ले पा रही थी। इस साल जब बीसीसीआई ने नौ राज्यों को मान्यता देते हुए विजय हजारे ट्रॉफी खेलने की अनुमति दी तो सभी राज्यों के क्रिकेटरों में नया उत्साह आ गया। आनन-फानन में इन सभी 9 राज्यों ने अपनी टीम का ऐलान किया और मैदान में उतर गए। बिहार, पुडुचेरी, उत्तराखंड, नागालैंड, मेघालय, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और सिक्किम की नौ टीमों को प्लेट ग्रुप में रखा गया।
टूर्नामेंट का आधा सफर हो चुका है समाप्त-
प्लेट ग्रुप की 9 टीमों के अलावा एलीट ग्रुप में 28 अलग-अलग क्रिकेट संघों की टीम इस टूर्नामेंट में खेल रही है। 19 सिंतबर से 20 अक्टूबर तक चलने वाले विजय हजारे ट्रॉफी का आधा सफर लगभग समाप्त हो चुका है। इस आधे सफर में कई टीमों ने शानदार प्रदर्शन किया है। लेकिन बिहार क्रिकेट टीम जैसा प्रदर्शन किया है, वो यह बताता है कि बिहार किसी से कम नहीं।
प्वाइंट टेबल में सबसे आगे है बिहार-
औसतन 6 से 7 मुकाबले अबतक सभी टीमें खेल चुकी है। इन मुकाबलों में किए प्रदर्शन के बाद प्वाइंट टेबल में एलीट ग्रुप में मुंबई की टीम सबसे ऊपर है। जबकि प्लेट ग्रुप में बिहार की टीम सबसे ऊपर है। मुंबई और बिहार दोनों ने अबतक सात-सात मुकाबलों से छह जीत हासिल की है। जबकि दोनों टीमों का एक-एक मैच बारिश के कारण रद्द करना पड़ा था। मुंबई और बिहार दोनों के खाते में सात मुकाबलों से 26 अंक है। लेकिन नेट रन रेट के मामले में बिहार ने रणजी ट्रॉफी को रिकॉर्ड 41 बार जीतने वाली टीम मुंबई को भी पछाड़ दिया है। मुंबई का नेट रननेट +1.634 है जबकि बिहार का नेट रन रेट +3.309 है।
इन खिलाड़ियों का प्रदर्शन दमदार-
बिहार की ओर से बाबुल कुमार, विकास रंजन, कप्तान केशव कुमार, रहमत उल्लाह जैसे खिलाड़ियों ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया है। इनकी प्रतिभा को देखते हुए यह कहा जा रहा है कि बिहार क्रिकेट टीम का भविष्य उज्ज्वल है। बीते 17 सालों के निलंबन के दौरान बिहार ने कई होनहार क्रिकेटरों को खोया है, इसमें राजीव कुमार, ईशान किशन, अनुकूल राय जैसे कई बड़ें नाम शामिल है। अब भी बिहार के कई होनहार क्रिकेटर झारखंड से खेल रहे है। यदि राजनीति से दूर रखते हुए बिहार क्रिकेट ऐसे ही बढ़ता रहा तो निश्चित तौर पर निकट भविष्य में बिहार से कई अच्छे क्रिकेटर निकलेंगे।
पृथ्वी शॉ भी बिहार से-
बिहार की जीत के बारे में एक हकीकत यह ही है यह प्रदर्शन प्लेट ग्रुप में आई है। इस ग्रुप की टीमें कमजोर हैं। लेकिन 17 साल की वापसी के बाद के नजरिए से देखें तो यह प्रदर्शन काफी अच्छा है। रही बात प्रतिभा कि तो अपने डेब्यू में शानदार शतक लगाने वाले 18 वर्षीय क्रिेकेटर पृथ्वी शॉ भी मूलरूप से बिहार से ही हैं।