
नई दिल्ली। समूह में किया जाने वाला कोई भी काम अपेक्षाकृत ज्यादा आसानी से हो जाती है। आप चाहे किसी भी काम को हाथ में ले और उसे करने के लिए आपके साथ प्रोत्साहित लोगों की टीम हो उसमें सफलता मिलने की संभावना ज्यादा होती है। लेकिन इसके लिए आवश्यक यह है कि आप अपने समूह पर विश्वास करे। न केवल विश्वास करे बल्कि समय-समय पर अपने समूह को प्रोत्साहित भी करे। खास कर समूह में शामिल किए गए नए लोगों को, ताकि उनको लगे कि इस सफलता में उनका भी महत्वपूर्ण योगदान है। क्रिकेट का खेल भी टीम वर्क है। यह किसी एक खिलाड़ी के दम पर जीती जाने वाली जंग नहीं बल्कि सभी के सहयोग से जीती जाने वाली बाजी है। भारतीय क्रिकेट टीम जिसे मौजूदा दौर में दुनिया की सबसे मजबूत टीम मानी जाती है, उसकी सफलता के पीछे भी यह लॉजिक काम करता है।
टीम की सफलता में सबकी भागीदारी
किसी भी टीम की सफलता में छोटे-बड़े सभी लोगों की भागीदारी होती है। क्रिकेट में भी यह बात लागू होती है। लेकिन यदि आपका समूह आपसे किसी बात से खिन्न हो तो सफलता तो दूर आप अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन भी नहीं कर सकते। भारतीय क्रिकेट टीम आज सफलता के सातवें आसमान पर है। इस कामयाबी के पीछे महेंद्र सिंह धोनी की बहुत बड़ी भूमिका है। आज वो टीम के कप्तान भले न हो, लेकिन धोनी ने टीम में कई ऐसी परंपरा शुरू की जो आज तक बनी हुई है।
धोनी ने किया खुलासा
महेंद्र सिंह धोनी जिस समय टीम इंडिया के कप्तान थें, तब उन्होंने एक परंपरा की शुरुआत की थी। जिसेक तहत वे सीरीज जीतने के बाद टीम के युवा खिलाड़ियों को टॉफी देते थे। कप्तानी छोड़ने के बाद आज भी यह परंपरा टीम इंडिया में बनी हुई है। इस परंपरा की बाबत धोनी ने एक टीवी शो में कहा कि जब टीम को कोई नया खिलाड़ी अच्छा परफॉर्म करता है और उसे ट्रॉफी थमा देते हैं, तो यह उसके लिए अप्रेजल जैसा होता है। इससे उसका आत्मविश्वास बढ़ता है। साथ ही धोनी ने कहा कि सीरीज जीतने के बाद नए खिलाड़ियों को ट्रॉफी देने से टीम को फायदा होता है। इससे नए खिलाड़ी आने वाले समय में और अच्छा करने को प्रेरित होता है।