
Cyber Fraud Report: देश में साइबर ठगी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इस साल 1 जनवरी से 30 जून के बीच पूरे देश में 12.71 लाख से अधिक साइबर फ्रॉड की शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें पीड़ितों ने 10,178 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की शिकायत की है। राज्यवार आंकड़ों में उत्तर प्रदेश सबसे ज्यादा शिकायतों के साथ पहले स्थान पर है, जबकि महाराष्ट्र में साइबर ठगी से सबसे अधिक 1,637.66 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया गया है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल 30 जून तक उत्तर प्रदेश में 1.85 लाख साइबर फ्रॉड की शिकायतें दर्ज की गईं, जो देश में सबसे अधिक हैं। इसके बाद महाराष्ट्र में 1.58 लाख, कर्नाटक में 1.21 लाख, गुजरात में 97,937 और बिहार में 93,137 शिकायतें दर्ज हुईं।
इसके अलावा राजस्थान में 75,883, पश्चिम बंगाल में 72,439, दिल्ली में 64,496, तमिलनाडु में 63,116 और हरियाणा में 58,721 साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज की गईं।
यदि साइबर ठगी से हुए आर्थिक नुकसान की बात करें तो महाराष्ट्र सबसे अधिक प्रभावित राज्य रहा। यहां लोगों से 1,637.66 करोड़ रुपये की साइबर ठगी हुई। इसके बाद कर्नाटक में 1,097.37 करोड़ रुपये, तमिलनाडु में 897.79 करोड़ रुपये, उत्तर प्रदेश में 734.19 करोड़ रुपये, गुजरात में 643.82 करोड़ रुपये, चंडीगढ़ में 630.53 करोड़ रुपये और तेलंगाना में 614.18 करोड़ रुपये की ठगी दर्ज की गई।
गृह मंत्रालय के अनुसार, देशभर में ऑनलाइन निवेश फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी लोन ऐप, फिशिंग, किसी और की पहचान बनाकर ठगी और सोशल मीडिया या मैसेजिंग ऐप के जरिए भेजे जाने वाले फर्जी लिंक के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। ठग आधुनिक तकनीक के साथ-साथ लोगों के डर और लालच का फायदा उठाकर उनके बैंक खातों को खाली कर रहे हैं।
देशभर में दर्ज 12.71 लाख शिकायतों में से 2.86 लाख मामलों को बैंकिंग कार्रवाई के लिए भेजा गया, जबकि 2.70 लाख शिकायतों पर बैंकों ने 'सिटिजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम' (CFCFRMS) के तहत कार्रवाई की। आंकड़ों के मुताबिक, 10,178.97 करोड़ रुपये की कथित ठगी में से बैंकों ने 2,968.85 करोड़ रुपये पर रोक लगाई, जो कुल राशि का करीब 29.17 प्रतिशत है।
आंकड़ों के अनुसार, 2021 से मई 2026 के बीच देशभर में लोगों ने 64,447 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराई। इनमें से 10,718 करोड़ रुपये पर बैंकों ने रोक लगाई, लेकिन अब तक पीड़ितों को केवल 323 करोड़ रुपये ही वापस मिल पाए हैं। बड़ी संख्या में धोखाधड़ी के इन मामलों की जांच चल रही है।