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निर्भया केसः दोषी पवन ने हाई कोर्ट में लगाई याचिका, गवाह की विश्वसनीयता पर उठाया सवाल

Nirbhaya Gangrape case हाईकोर्ट पहुंचा पवन गुप्ता गवाह की विश्वसनीयता पर उठाए सवाल कोर्ट ने खारिज की याचिका

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पवन गुप्ता

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में वर्ष 2012 में हुए निर्भया गैंगरेप ( Nirbhaya Gang rape ) और हत्या मामले में दोषी लगातार फांसी से बचने के लिए कोई न कोई हथकंडा अपना रहे हैं। इस बीच दोषी पवन गुप्ता ( Pawan Gupta ) ने अब दिल्ली हाई कोर्ट ( Delhi High Court ) का दरवाजा खटखटाया है।

दोषी पवन ने अपने वकील के जरिए दाखिल याचिका में ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है।

उसने इस मामले के एकमात्र गवाह की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए याचिका दाखिल की है, जिसमें दावा किया है कि वह एक गवाह है और उसका बयान विश्वसनीय नहीं था।

हालांकि गुरुवार को हुई सुनवाई को दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।

आपको बात दें कि इससे पहले दोषी पवन ने कोर्ट में याचिका दाखिल करके पुलिसर्मियों पर मारपीट का आरोप लगाया था। दोषी विनय ने उपराज्यपाल के समक्ष याचिका दाखिल कर फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग कर चुका है।

नए डेथ वारंट के मुताबिक, निर्भया के चारों दोषियों को 20 मार्च सुबह साढ़े पांच बजे फांसी की सजा होनी है।

वहीं दोषी पवन गुप्ता लगातार नए दांव पेच अपना रहा है। इसी कड़ी में मंडोली जेल के दो पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर रजिस्टर कराने के लिए कोर्ट पहुंचा। उसने मारपीट का आरोप लगाया है।

कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया है। निर्भया गैंगरेप के दोषी पवन ने दिल्ली स्थित मंडोली जेल के दो पुलिसकर्मियों के खिलाफ मारपीट का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि इससे उसके सिर में चोटें आईं।

कोर्ट ने इस मामले में जेल प्रबंधन को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है।

दोषी विनय शर्मा ने अपने वकील एपी सिंह के जरिए दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल से फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग की है। एपी सिंह ने सीआरपीसी के सेक्शन 432 और 433 के तहत फांसी की सजा को निलंबित करने की मांग की है।

छह फरवरी को गुनाहगार मुकेश के भाई सुरेश की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। सुरेश की ओर से वकील एम.एल.शर्मा ने याचिका दायर की थी।

शर्मा का आरोप है कि इस मुकदमे में मुकेश के लिए कोर्ट की ओर से नियुक्त वकील वृंदा ग्रोवर ने उस पर दबाव डाल कर क्यूरेटिव याचिका दाखिल करवाई थी।

एम.एल.शर्मा के मुताबिक क्यूरेटिव पेटिशन दायर करने की समय सीमा तीन साल थी, जिसकी जानकारी मुकेश को नहीं दी गयी। इसलिए मुकेश को नए सिरे से क्यूरेटिव याचिका और दया याचिका दाखिल करने का मौका दिया जाए।

इस याचिका पर नौ मार्च को सुनवाई हो सकती है। पटियाला हाउस कोर्ट ने निर्भया के गुनहगारों के लिए 20 मार्च सुबह 5.30 बजे फांसी देने के लिए डेथ वारंट जारी किया है।

Published on:
12 Mar 2020 04:00 pm
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