समझौता ब्लास्ट मामले में NIA की विशेष अदालत ने फैसले की कॉपी को सार्वजनिक कर दिया है। न्यायाधीश जगदीप ने कहा कि अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों में अभाव देखने को मिला है। साक्ष्यों में अभाव की वजह से आतंकवाद की एक घटना अनसुलझी रह गई।
नई दिल्ली। समझौता ब्लास्ट मामले में NIA की विशेष अदालत के न्यायाधीश जगदीप सिंह ने फैसले की कॉपी को सार्वजनिक कर दिया है। पंचकुला में चल रही सुनवाई के दौरान न्यायाधीश जगदीप ने कहा कि वह विश्वसनीय और पर्याप्त सबूतों के अभाव में एक नृशंस कृत्य के फैसले को गहरी पीड़ा के साथ समाप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों में अभाव देखने को मिला है। जिसकी वजह से आतंकवाद की एक घटना अनसुलझी रह गई।
न्यायाधीश जगदीप सिंह ने फैसला सुनाते हुए कहा कि आतंकवाद की कोई जाति और कोई धर्म नहीं होता। उन्होंने कहा कि दुनिया का कोई भी धर्म हिंसा को बढ़ावा नहीं देता। सबूतों के महत्व पर न्यायाधीश ने कहा कि कानून और अदालत लोकप्रिय या प्रमुख सार्वजनिक धारणा नहीं है। इसे सबूतों के आधार पर अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचना होता है।
उन्होंने कहा कि शक या संदेह सबूतों और रिकॉर्ड की जगह नहीं ले सकता। किसी भी मामले में केवल छोटे-मोटे तथ्यों को ही पर्याप्त नहीं माना जा सकता। आपराधिक न्यायशास्त्र के कार्डिनल प्रिंसिपल के अनुसार अभियुक्त के खिलाफ आरोपों को सबूतों के आधार पर ही स्थापित किया जा सकता है।
आपको बता दें कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की एक अदालत ने फरवरी 2007 में समझौता एक्सप्रेस में हुए विस्फोट के मामले में हिंदू नेता स्वामी असीमानंद समेत सभी चार आरोपियों को बरी कर दिया था। 18 फरवरी 2007 को हरियाणा के पानीपत के पास ट्रेन में हुए इस बम विस्फोट में 68 लोग मारे गए थे। इनमें 43 पाकिस्तानी, 10 भारतीय और 15 अज्ञात लोग थे। दस पाकिस्तानियों समेत कई लोग घायल भी हुए थे।
एनआईए की अदालत ने जनवरी 2014 में असीमानंद, कमल चौहान, राजिंदर चौधरी और लोकेश शर्मा के खिलाफ आरोप निर्धारित किए थे। यह सभी बुधवार को अदालत में मौजूद थे। इन सभी पर हत्या, देशद्रोह, हत्या, हत्या के प्रयास, आपराधिक षडयंत्र के आरोप थे।