
CG Mining Protest: किरन्दुल में मंगलवार को उस वक्त माहौल गरमा गया, जब एनएमडीसी परियोजना में कंपनी के सीएमडी अमिताव मुखर्जी के आगमन के दौरान स्थानीय युवाओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। युवाओं ने काली पट्टी बांधकर और हाथों में तख्तियां लेकर सीआईएसएफ गेट के सामने नारेबाजी करते हुए अपना आक्रोश जाहिर किया। अचानक हुए इस विरोध से परियोजना क्षेत्र में कुछ देर के लिए तनावपूर्ण स्थिति बन गई।
प्रदर्शनकारियों ने ‘‘जल-जंगल-•ामीन बचाओ’’, ‘‘खदान क्रमांक 13 और 04 को बंद करो’’ और ‘‘किरन्दुल को धूल मुक्त करो’’ जैसे तीखे नारे लगाए। इन नारों के जरिए युवाओं ने खनन गतिविधियों के खिलाफ अपना विरोध स्पष्ट रूप से दर्ज कराया। युवाओं ने स्पष्ट रूप से मांग रखी कि खदान क्रमांक 13 एवं 04 को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए और खनन से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं। इसके साथ ही स्थानीय एनसीएल कार्यालय को हटाने की मांग भी उठाई गई।
प्रदर्शन के दौरान युवाओं ने किरन्दुल नगर को धूल प्रदूषण से मुक्त करने और किरन्दुल-बचेली में कार्यरत शासकीय कर्मचारियों के लिए समुचित आवास व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी प्रमुखता से रखी।
काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण लेकिन आक्रामक अंदाज में किए गए इस प्रदर्शन ने प्रशासन और एनएमडीसी प्रबंधन पर दबाव बनाने का काम किया। यह विरोध क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा।
स्थिति को संभालने के लिए पुलिस प्रशासन, एनएमडीसी प्रबंधन और सीआईएसएफ के अधिकारियों को हस्तक्षेप करना पड़ा। अधिकारियों द्वारा यह आश्वासन दिए जाने के बाद कि युवाओं की मुलाकात सीएमडी से करवाई जाएगी, प्रदर्शनकारियों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया। यह प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि खनन परियोजना को लेकर स्थानीय स्तर पर असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़ा रूप ले सकता है।
किरंदुल, जो Dantewada जिले का प्रमुख खनन क्षेत्र है, लंबे समय से लौह अयस्क उत्पादन के लिए जाना जाता रहा है। यहां NMDC की खदानें देश की बड़ी औद्योगिक जरूरतों को पूरा करती हैं। खासकर खदान क्रमांक 14, 11B, 13 और 4 जैसे प्रोजेक्ट राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
लेकिन विकास और खनन के इस मॉडल के साथ स्थानीय स्तर पर कई तरह की चुनौतियां भी लगातार सामने आती रही हैं। किरंदुल-बचेली क्षेत्र में बीते वर्षों में धूल प्रदूषण, भारी ट्रकों की आवाजाही, सड़क क्षति, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और विस्थापन जैसे मुद्दे बार-बार उठते रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि खनन से होने वाले आर्थिक लाभ का अनुपात उनके जीवन स्तर में उतना नहीं दिखता, जितना असर पर्यावरण और स्वास्थ्य पर पड़ता है।