DRG टीम में शामिल होकर नक्सलियों के खिलाफ चल रहे अभियान को सफल बनाने के कारण सरेंडर कर चुके नक्सलियों (Surrendered naxalite) को काम के साथ सम्मान भी मिल रहा है। नक्सली आज गोपनीय सैनिक से लेकर बड़े पदों पर भी तैनात हो रहे हैं
दंतेवाड़ा. नक्सलवाद (Naxalism) के खिलाफ सफलता हांसिल करने के मामले में दंतेवाड़ा राज्य के बाकी नक्सल प्रभावित इलाकों से काफी काफी आगे चल रहा है। पिछले दो महीने में सात बड़े इनामी नक्सलियों को ढेर किया गया है। इन ऑपरेशन की सफलता में DRG के जवानों का अहम योगदान है। जवान विषम परिस्थितियों में जंगलों की खाक छानकर नक्सलियों के ठिकाने तक पहुंचकर एनकाउंटर में उन्हें ढेर कर रहे हैं। टीम का हर जवान नक्सलियों को मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी में रहता है।
खास बात यह है कि सरेंडर नक्सली (Surrendered naxalite) इस टीम का मजबूत हिस्सा है। DRG की टीमों में 85 तो सिर्फ सरेंडर नक्सली ही है इनमें 72 पुरुष व 13 महिलाएं हैं। जो अब नक्सलवाद के खिलाफ हथियार उठाकर नक्सलियों से मुकाबला कर रही हैं। कभी समाज की मुख्यधारा से भटक कर हिंसा के रास्ते पर चलने वाले यह लोग खुलकर जीवन जी रहे हैं।
दंतेवाड़ा पहला ऐसा जिला है जहां डीआरजी की टीम में बड़ी संख्या में नक्सलियों को शामिल किया गया है। इनसे नक्सल ऑपरेशन का सहयोग मिल रहा है।DRG में नक्सलियों को काम करते देख और भी नक्सली सरेंडर कर रहे हैं। हाल ही में इनामी महिला नक्सली लाली के सरेंडर की बड़ी वजह यही थी कि उसकी जूनियर सुंदरी DRG टीम में शामिल होकर काम कर रही है।
एक साल में 40 नक्सलियों ने किया सरेंडर
दंतेवाड़ा में डीआरजी की छः टीमें है। पांच टीमों में 50-50 जवान है। सभी टीमों में 12 से 15 की संख्या में सरेंडर नक्सली है। जबकि महिला टीम में 30 महिलाएं हैं। इसमें 13 सरेंडर नक्सली है। सरेंडर कर चुके नक्सली (Surrendered naxalite) DRG टीम के साथ मिलकर सरेंडर करवाने, सूचनाओं पर नक्सलियों की गिरफ्तारी करवाने,सफल एनकाउंटर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।यही वजह है की ये नक्सली गोपनीय सैनिक से लेकर एसआई तक बन चुके हैं।
महिला नक्सलियों को भी बनाया हिस्सा
दंतेवाड़ा डीआरजी टीम में पुरुषों और महिलाओं में किसी तरह का भेद-भाव नहीं किया गया। हालही में बनी महिला डीआरजी टीम बनाई गई। टीम में 30 महिलाएं हैं जिसमें से 13 सरेंडर महिला नक्सली है जो नक्सल ऑपरेशन पर जा रही है। प्रदेश में ऐसा अब तक कहीं नहीं हुआ।