
Datia Murder Mystery- मध्य प्रदेश के दतिया जिले में 11 महीने बाद एक शख्स की मौत का खुलासा किया गया है। जिले के बड़ौनी थाना क्षेत्र के छता गांव में सामने आए एक दिल दहला देने वाले हत्याकांड ने पूरे जिले को झकझोर दिया है। महज 40 हजार रुपए के विवाद में एक कलयुगी बेटे ने अपने ही पिता की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी। वारदात को छिपाने के लिए उसने शव को कथरी में लपेटकर घर में रखे लोहे के बक्से में बंद कर दिया और कमरे पर ताला लगा दिया। करीब छह महीने तक शव उसी बक्से में पड़ा रहा। जब शव पूरी तरह कंकाल में बदल गया तो उसने अपने ताऊ के साथ मिलकर हड्डियां और अन्य अवशेष सामली नदी में फेंक दिए। इसके बाद करीब 11 महीने तक गांव और रिश्तेदारों को यही कहता रहा कि उसके पिता मुंबई मजदूरी करने गए हैं। आखिरकार पुलिस की वैज्ञानिक जांच और लगातार पूछताछ ने इस खौफनाक हत्या की परतें खोल दीं।
बुधवार को पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित प्रेस वार्ता में पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि मृतक के बेटे नितिन बुंदेला और उसके ताऊ कल्ली उर्फ अस्पेंद्र बुंदेला को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया।
मृतक उदयभान सिंह बुंदेला (45) के बड़े भाई शिवराज सिंह बुंदेला ने 28 जून 2026 को बड़ौनी थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनका भाई करीब 11 महीने से लापता है और उन्हें शुरू से ही भतीजे नितिन पर संदेह है। इसी आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की और संदेह के दायरे में आए नितिन से पूछताछ की।
पूछताछ के दौरान नितिन ने पुलिस को बताया कि अगस्त 2025 में ट्रैक्टर के कल्टीवेटर का फाल बदलते समय हादसे में उसके पिता की मौत हो गई थी। उसने दावा किया कि डर के कारण शव को लोहे के बक्से में छिपा दिया और बाद में ताऊ की मदद से सामली नदी में फेंक दिया।
लेकिन पुलिस उसकी कहानी से संतुष्ट नहीं हुई। एफएसएल टीम ने घटनास्थल और ट्रैक्टर की वैज्ञानिक जांच की। जांच में हादसे की बात पूरी तरह झूठी निकली। इसके बाद सख्ती से पूछताछ करने पर नितिन ने हत्या की पूरी साजिश कबूल कर ली।
आरोपी ने बताया कि पिता ने ट्रैक्टर की किस्त और खेती के काम के लिए उसे 40 हजार रुपए दिए थे। उसने पूरी रकम शराब और जुए में खर्च कर दी। जब पिता ने पैसे वापस मांगे तो दोनों के बीच विवाद बढ़ गया।अगस्त 2025 की एक रात उदयभान घर के बाहर खाट पर सो रहे थे। इसी दौरान नितिन ने कुल्हाड़ी से उनके सिर पर लगातार तीन-चार वार कर उनकी हत्या कर दी।
हत्या के बाद आरोपी ने शव को कथरी में लपेटकर लोहे के बक्से में बंद किया और कमरे में ताला लगा दिया। खून से सनी खाट भी ठिकाने लगा दी। कुछ दिन रिश्तेदारों के यहां रहने के बाद वह गांव लौटा और सभी से कहता रहा कि उसके पिता मजदूरी करने मुंबई गए हैं। करीब छह महीने बाद जब शव पूरी तरह कंकाल में बदल गया तो उसने अपने ताऊ कल्ली उर्फ अस्पेंद्र बुंदेला को पूरी घटना बता दी। दोनों ने रात के अंधेरे में हड्डियां, कपड़े और अन्य अवशेष कथरी में बांधकर सामली नदी की पुलिया के पास फेंक दिए।
कुछ समय बाद नितिन और उसके ताऊ के बीच विवाद हो गया। गुस्से में ताऊ ने परिवार के लोगों के सामने हत्या का पूरा सच बता दिया। इसके बाद परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने दोनों आरोपियों से पूछताछ की तो पूरा घटनाक्रम सामने आ गया।
पुलिस आरोपियों को लेकर सामली नदी पहुंची। उनकी निशानदेही पर मानव अस्थियां, मृतक के कपड़े, कथरी और अन्य अवशेष बरामद किए गए। परिजनों ने कपड़ों के आधार पर मृतक की पहचान की। पुलिस ने वह लोहे का बक्सा भी जब्त किया, जिसमें कई महीनों तक शव रखा गया था। एफएसएल जांच और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने हत्या की पुष्टि कर दी।
पुलिस के अनुसार मामले के खुलासे में गुमशुदगी की जांच, एफएसएल की वैज्ञानिक रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले परिस्थितिजन्य साक्ष्य, आरोपियों से पूछताछ और उनकी निशानदेही पर हुई बरामदगी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पहले हादसे की कहानी गढ़कर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की गई, लेकिन वैज्ञानिक जांच के सामने आरोपी ज्यादा देर तक टिक नहीं सके।