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Datia news: ‘अपना फर्ज निभाऊंगी…’, दुनिया छोड़ चले गए पापा, नम आंखों से 3 बेटियों ने अर्थी को दिया कंधा

daughters fulfilled sons duties: तीनों बेटियों ने पिता संजय सिंह राठौर की अर्थी को कंधा दिया और मुखाग्नि दी। बेटा-बेटी के भेद को पीछे छोड़ भावुक कर देने वाला दृश्य, समाज के लिए प्रेरणा बना।
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daughters fulfilled sons duties:3 बेटियों ने निभाया बेटों का फर्ज (Photo Source - Patrika)

daughters fulfilled sons duties:3 बेटियों ने निभाया बेटों का फर्ज (Photo Source - Patrika)

Datia news: समाज में बेटा-बेटी के भेद को पीछे छोड़ते हुए बालोदा लक्खा में एक भावुक कर देने वाला दृश्य देखने को मिला। यहां तीन बेटियों ने अपने पिता की अंतिम यात्रा में बेटे का फर्ज निभाते हुए न केवल अर्थी को कंधा दिया, बल्कि श्मशान घाट पहुंचकर मुखाग्नि भी दी। यह दृश्य देखकर अंतिम यात्रा में शामिल हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। बालोदा लक्खा निवासी तीन बेटियों के पिता संजय सिंह राठौर (40) का अचानक हृदयाघात के कारण स्वास्थ्य खराब हो गया था।

परिजन उन्हें तत्काल उपचार के लिए बड़नगर अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक जांच के बाद उन्हें उज्जैन रेफर कर दिया। उपचार के दौरान संजय सिंह का निधन हो गया। संजय सिंह की मौत की खबर जैसे ही नगर में पहुंची, शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों सहित सभी परिचितों के बीच गम का माहौल बन गया।

बेटियां बनीं सहारा

संजय सिंह की बेटियां वंशिका, अंशिका और निशिका ने दुख की इस घड़ी में हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अपने पिता के प्रति अपने प्रेम और जिम्मेदारी को निभाते हुए अर्थी को कंधा दिया। तीनों बेटियां अपने पिता की अंतिम यात्रा में घर से लेकर श्मशान घाट तक कदम से कदम मिलाकर चलीं। श्मशान घाट पर मौजूद लोगों के बीच तीनों बहनों ने मिलकर पिता को मुखाग्नि दी। इस मार्मिक दृश्य ने लोगों को भावुक कर दिया। लोगों ने कहा कि बेटियां किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं होतीं और संजय सिंह की प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। बेटियों का कहना था कि वे अपना बेटों की तरह ही पूरी फर्ज निभाएंगी।

नहीं पहुंचे बच्चे

वहीं एक अन्य मामले में एक पिता ने जिंदगी भर अपने 4 बच्चों को अच्छी तरह से पाला लेकिन आखिरी समय में बच्चे पिता को देखने तक नहीं पहुंचे। ये मामला एमपी के भोपाल शहर का है। यहां पर 'अपना घर' वृद्धाश्रम में 70 साल घनश्याम की मौत के बाद दो दिन तक उनके परिवार का इंतजार किया गया लेकिन बेटियों ने आने से मना कर दिया। बेटों को भी अंतिम संस्कार के लिए बुलाया गया लेकिन बेटों ने भी पहुंचने में असमर्थता जताई।

परिवार की ओर से बार-बार आश्रम प्रबंधन से ही अंतिम संस्कार करने और डेथ सर्टिफिकेट उपलब्ध कराने को कहा जाता रहा। आश्रम संचालिका माधुरी मिश्रा के मुताबिक उनके परिवार से लगातार संपर्क किया गया और घनश्याम जी के शव को दो दिन तक रखा भी गया लेकिन परिवार से कोई उन्हें देखने तक नहीं आया। बाद में पुलिस की मदद से अंतिम संस्कार कराया गया।