
दौसा। मां का नामांकन खारिज होने की आशंका के बीच 21 वर्षीय बेटी खुशी खण्डेलवाल ने चुनावी मैदान में उतरकर न केवल परिवार की साख बचाई, बल्कि लाखनपुर ग्राम पंचायत की सरपंच भी बन गई। शिवसिंहपुरा पंचायत समिति की इस ग्राम पंचायत में खुशी को दौसा जिले की सबसे कम उम्र की सरपंच चुने जाने का गौरव मिलने की चर्चा है। उन्होंने वरिष्ठ कांग्रेस नेता ईश्वरलाल मीना की पुत्रवधू को हराया। दरअसल, ग्रामीणों ने बाबूलाल खण्डेलवाल की पत्नी इन्द्रा खण्डेलवाल को प्रत्याशी बनाने का निर्णय किया था, लेकिन नामांकन के दौरान उनका नाम लालसोट नगर परिषद की मतदाता सूची में भी दर्ज होने से नामांकन खारिज होने की आशंका हुई।
ऐसे में बेटी खुशी ने मां की जगह चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। दोनों ने नामांकन दाखिल किया, लेकिन जांच में इन्द्रा का नामांकन खारिज हो गया और खुशी का वैध पाया गया। एमएससी (जूलॉजी) तक पढ़ी खुशी ने बताया कि ग्राम पंचायत की समस्याओं का समाधान, विकास कार्यों को गति देना और सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकता रहेगी।
खुशी की जीत ने परिवार का 21 साल पुराना चुनावी इतिहास भी ताजा कर दिया। वर्ष 2005 में उनकी दादी कमला गुप्ता ने चौण्डियावास ग्राम पंचायत से सरपंच का चुनाव लड़ा था, लेकिन ईश्वरलाल मीना की पत्नी से हार गई थीं। अब खुशी ने उसी राजनीतिक परिवार की पुत्रवधू को हराकर सरपंच पद हासिल किया। जीत की खबर सुनकर दादी भावुक हो गईं और उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।
गांवों की सरकार चुनने के लिए हुए पंचायतीराज आम चुनाव-2026 के नतीजों में कहीं एक-एक वोट के लिए कांटे की टक्कर देखने को मिली तो कहीं प्रत्याशियों ने हजारों वोटों के अंतर से प्रतिद्वंद्वियों को पछाडकर बड़ी जीत दर्ज की। लालसोट, रामगढ़ पचवारा और शिवसिंहपुरा पंचायत समितियों की 83 ग्राम पंचायतों के चुनाव परिणामों में सबसे करीबी मुकाबला लालसोट की घाटा ग्राम पंचायत में रहा, जहां केसंता गुर्जर ने महज एक वोट से जीत हासिल की। वहीं लालसोट की डिडवाना ग्राम पंचायत में दीपक शर्मा ने 2554 वोटों के विशाल अंतर से जीत दर्ज कर तीनों पंचायत समितियों में सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड बनाया। चुनाव परिणामों की एक और खास तस्वीर यह रही कि 83 में से 43 ग्राम पंचायतों में महिलाओं ने सरपंच पद पर कब्जा जमाया।
चुनाव में कई ग्राम पंचायतों के परिणाम आखिरी वोटों तक रोमांच पैदा करते रहे। बगड़ी में मन्नालाल बैरवा सात वोट से विजयी रहे। खेड़ली में लल्लूराम ने 26, लाडपुरा में अर्चना ने 34 तथा देवली में रामलाल मीना और खटवा में मंजू देवी रैगर ने 39-39 वोटों से जीत दर्ज की। लालसोट की 30 ग्राम पंचायतों में छह जगह जीत का अंतर 50 वोट से कम रहा। इसी तरह रामगढ़ पचवारा पंचायत समिति में भी कई पंचायतों में कांटे की टक्कर रही। कल्लावास में राकेश कुमार मीना ने कमलेश कुमार मीना को महज छह वोट से हराया। कोलीवाड़ा में बाबूलाल मीना 8 वोट और सिन्दोली में तुलसी देवी 9 वोट से विजयी रहीं। श्रीया में बादाम देवी ने 14, हमेल्यावाला में विकास मीना ने 25, टोरडा में सीताराम बैरवा ने 27 तथा ढोलावास में रामविलास ने 30 वोटों से जीत हासिल की।
गोपालपुरा में श्रृंगारी देवी 45 वोटों से विजयी रहीं। यहां 34 में से दस पंचायतों में जीत का अंतर 50 वोट से कम रहा। शिवसिंहपुरा पंचायत समिति में नालावास में सम्पती देवी ने महज आठ वोट से जीत दर्ज की। रतनपुरा में लक्ष्मी देवी शर्मा 15, महाराजपुरा में किशनलाल मीना 21 और समेल में रेवडमल मीना 25 वोटों से विजयी रहे। संवासां में विमला देवी ने 32, थूणी धीराजपुरा में लल्ली देवी ने 34 और झापदा में कैलाश चन्द बैरवा ने 44 वोटों से जीत हासिल की। इस पंचायत समिति की 19 में से सात पंचायतों में जीत का अंतर 50 वोट से कम रहा।
तीनों पंचायत समितियों में डिडवाना ग्राम पंचायत के अलावा टोडागांगा में रतनलाल सैनी ने 1094 वोटों से जीत दर्ज की। इसी तरह शिवसिंहपुरा पंचायत समिति में सबसे बड़ी जीत तलावगांव के सुरेन्द्र सिंह के नाम रही। उन्होंने 726 वोटों से जीत दर्ज की। निझर्रना में बुलबुल राजावत 623 और श्रीमा में रामकरण मीना 589 वोटों से विजयी रहे। चौडियावास में ममता देवी ने 377, मटलाना में हरकेश मीना ने 349 तथा शिवसिंहपुरा में शिमला देवी ने 311 वोटों से जीत हासिल की। रामगढ़ पचवारा पंचायत समिति में राहवास ग्राम पंचायत की सुनीता मीना सबसे बड़े अंतर से विजयी रहीं। उन्होंने कैलाशी देवी को 607 वोटों से हराया। जगनेर तुर्कान रामनगर में सलमा खान 425, जीतपुर में धापा देवी 398, सोनड में खेलन्ता 395 और पालूंदा में निशा मीना 376 वोटों से जीतीं। बीछा में ममता मीना को 1577 वोट मिले, लेकिन नीतू मीना को 1408 वोट मिलने से जीत का अंतर 169 वोट ही रहा।