
Bharatpur-Beawar Greenfield Expressway: दौसा। प्रस्तावित भरतपुर-ब्यावर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के सर्वे को लेकर दौसा जिले के लालसोट उपखंड क्षेत्र के ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। खेमावास, टोडाठेकला, पट्टी किशोरपुरा और खेडला खुर्द ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों ने उपखंड अधिकारी विजेंद्र कुमार मीणा को ज्ञापन सौंपकर एक्सप्रेसवे का रूट बदलने की मांग की। साथ ही मांग नहीं मानने पर हाईवे जाम व उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित भरतपुर-ब्यावर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के सर्वे में बिनोरी स्थित दक्षिण सागर बांध और बिनोरी सागर बांध क्षेत्र को शामिल किया गया है। दोनों बांध ईआरसीपी परियोजना से जुड़े हुए हैं तथा इन्हें आपस में जोड़कर उनकी जलभराव क्षमता बढ़ाई गई है। इन जलाशयों पर लालसोट और बामनवास तहसील के 25 से 30 गांवों के करीब पांच लाख लोगों, हजारों मवेशियों तथा लगभग पांच हजार हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई निर्भर है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि बांधों को नुकसान पहुंचने पर बिनोरी, सूरतपुरा, बिलौणा कलां, दौसाड़ा, श्यामपुरा खुर्द, बगड़ी, खुर्रा, किशोरपुरा, महाराजपुरा, भानपुरा, डिवाचली, हमीरपुरा, गुढला, नांवड़, लिवाली, ढोसी, रामसर, खेडला और ककराला सहित कई गांवों में पेयजल व सिंचाई संकट गहरा जाएगा। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि वर्ष 2001 में सरकार ने करीब पांच करोड़ रुपए खर्च कर दोनों बांधों को एकीकृत कर उनकी क्षमता बढ़ाई थी, लेकिन अब प्रस्तावित सर्वे से उस निवेश और जल संरक्षण प्रयासों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा, जल संसाधन विभाग के अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को पहले भी अवगत कराया जा चुका है। उन्होंने मांग की कि एक्सप्रेसवे का रूट बांध क्षेत्र से हटाकर अन्यत्र निर्धारित किया जाए। साथ ही चेतावनी दी कि मांग पर शीघ्र निर्णय नहीं होने पर किसान और ग्रामीण आंदोलन तथा हाईवे जाम करने को मजबूर होंगे।
ज्ञापन में ग्रामीणों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि इस संबंध में पूर्व में भी कई बार लिखित एवं मौखिक रूप से मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा, जल बोर्ड के चीफ इंजीनियर, जिला कलक्टर, एक्सएन, एईएन और स्थानीय विधायक को अवगत कराया जा चुका है। इसके बावजूद आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, भरतपुर-ब्यावर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के सर्वे को बिनोरी बांध और दक्षिण सागर बांध को पूरी तरह छोडकऱ (रूट डाइवर्ट कर) अन्यत्र स्थान से किया जाए एवं जल स्रोतों और पर्यावरण को इस विनाशकारी विकास से बचाया जाए। यदि प्रशासन और सरकार ने इस मांग पर तुरंत ध्यान नहीं दिया, तो क्षेत्र की आम जनता और किसान अपने हक और अधिकारों के लिए उग्र आंदोलन करने और हाईवे जाम करने पर मजबूर होंगे।