तहसीलदार ने अधिवक्ताओं के खिलाफ नामजद प्राथमिकी देते हुए मारपीट के आरोप लगाए।
Lalsot Tehsildar Accused By Lawyers: दौसा जिले के लालसोट उपखण्ड अधिकारी न्यायालय द्वारा एक जमीन पर जारी किए स्थगन आदेश को नोट को लेकर हुए विवाद ने बड़ा रूप धारण कर लिया। मामले को लेकर मंगलवार को तहसीलदार अमितेश मीना व अधिवक्ता आमने सामने हो गए, नौबत हंगामा, नारेबाजी, धक्का-मुक्की व मारपीट तक जा पहुंची।
तहसीलदार राजस्व कर्मियों के साथ पुलिस थाने पर जा पहुंचे, जहां उन्होंने अधिवक्ताओं के खिलाफ नामजद प्राथमिकी देते हुए मारपीट के आरोप लगाए। करीब दो घंटे बाद भी प्राथमिकी दर्ज नही होने पर तहसीलदार राजस्व कर्मियों के साथ थाने के बाहर धरने पर बैठ गए। दूसरी ओर, अधिवक्ताओं ने मारपीट के आरोपों को खारिज करते हुए तहसीलदार पर वकीलों के साथ अभद्रता करने एवं गार्ड कर्मियों द्वारा धक्का-मुक्की देकर बाहर निकाले जाने के आरोप लगाए है।
जानकारी के अनुसार, मंगलवार दोपहर डिगो गांव के जाजमो का डेरा ढाणी की एक जमीन पर उपखण्ड अधिकारी न्यायालय द्वारा जारी अस्थायी निषेधाज्ञा को जमाबंदी पर अंकन के लिए संबंधित पक्ष तहसीलदार अमितेश मीना के समक्ष पहुंचा। जहां तहसीलदार ने बिना तहरीर नोट अंकन से मना करते हुए संबंधित पक्ष को बैरंग भेज दिया।
कुछ देर बाद पक्षकार के साथ अधिवक्ता सूरज शर्मा एवं मोहित शर्मा तहसीलदार के पास पहुंचे। जहां नोट अंकन मना करने पर आपसी कहासुनी हो गई। कुछ देर बाद दर्जनों की संख्या में वकील जुलूस के रुप में नारेबाजी करते हुए तहसीलदार कार्यालय में पहुंचे। जहां वकीलों ने तहसीलदार चेंबर में घुसकर जमकर हंगामा किया।
जानकारी मिलने पर लालसोट थानाधिकारी श्रीकिशन मीना ने मौके पर पहुंचकर घटना का जायजा लिया। राजस्व कर्मचारियों ने भी घटना पर आक्रोश व्यक्त करते हुए जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की। मामले को लेकर बार अध्यक्ष के साथ प्रधान नाथूलाल मीना, प्रेमप्रकाश चौधरी, चंद्रभानसिंह, संजीव जोशी, भोला एमडी, सीताराम शर्मा, अनूप माठा एवं प्रकाश निर्झरना समेत कई अधिवक्ताओं ने उपखण्ड अधिकारी विजेन्द्र कुमार मीना से मिलकर तहसीलदार पर वकीलों के साथ अभद्रता करने के आरोप लगाए।