Rajasthan Farmers: मानसून की अंतिम बारिश से सरसों और चना की बुवाई का रकबा करीब 5,400 हैक्टेयर बढ़ा, जबकि गेहू की बुवाई का रकबा 6,900 हैक्टेयर घट गया।
राजस्थान के दौसा जिले में इस रबी सीजन में अधिकतर किसानों ने गेहूं, जौ, चना और सरसों की बुवाई की। मानसून की अंतिम बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी बनी रही, जिसका फायदा उठाकर किसानों ने लगभग 11 हजार हेक्टेयर में अक्टूबर के मध्य तक अगेती गेहूं की बुवाई कर दी। यह बुवाई सामान्य समय से करीब एक माह पहले हुई।
अंकुरण तो अच्छा हुआ, लेकिन बुवाई के बाद लगातार बढ़ते तापमान के कारण फसल पर विपरीत असर पड़ा। आमतौर पर दिसंबर में कोहरा, धुंध और कड़ाके की सर्दी रबी फसलों के लिए आवश्यक होती है, लेकिन इस बार तापमान 20 से 28 डिग्री तक बना रहा।
इसके परिणामस्वरूप गेहूं-जो की फसल में पौधों की ऊंचाई सामान्य 60-120 सेमी के बजाय 60-80 सेमी रह गई और फुटाव कम हुआ। समय से पहले कल्ले निकल आए, जिससे पैदावार घटने का अनुमान है। अगेती होने से फसल की कटाई जनवरी अंत या फरवरी मध्य तक संभव होगी।
गेहूं की पैदावार के लिए सही बुवाई समय 10 से 25 नवम्बर है। अगेती बुवाई 25 अक्टूबर से 10 नवम्बर और पिछेती बुवाई 25 नवम्बर से 15 दिसंबर के बीच होती है। बुवाई के समय तापमान 20-25 डिग्री सेल्सियस, वनस्पतिक विकास के लिए 15-24 डिग्री सेल्सियस, दाना बनने के समय 23-25 डिग्री सेल्सियस और पकने के समय 25-30 डिग्री सेल्सियस तापमान होना चाहिए। 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पैदावार घटा देता है। सही समय और तापमान में जड़ों का विकास बेहतर होता है और अधिक फुटाव से अच्छी पैदावार मिलती है।
भंडाना निवासी किसान मनोहर लाल शर्मा ने बताया कि मानसून की अंतिम बारिश अच्छी थी, जिससे खेतों में गेहूं बोने लायक नमी थी। श्रम, पानी, डीजल और बिजली बचाने के लिए उन्होंने अगेती बुवाई कर दी, लेकिन समय से पहले कल्ले निकल आए। मजबूर होकर कई किसानों को अगेती फसल हटाकर सही समय पर दोबारा बुवाई करनी पड़ी।
मानसून की अंतिम बारिश से सरसों और चना की बुवाई का रकबा करीब 5,400 हैक्टेयर बढ़ा, जबकि गेहू की बुवाई का रकबा 6,900 हैक्टेयर घट गया। वर्ष 2024-25 में कृषि विभाग ने गेहू-जो के लिए 80,000 हैक्टेयर का लक्ष्य रखा था, जिसमें 88,200 हैक्टेयर बुवाई हुई। इसी अवधि में चना-सरसों का बुवाई रकबा घटकर 20,405 हैक्टेयर रह गया। वर्ष 2025-26 में गेहूं-जो की बुवाई 6,900 हैक्टेयर कम और चना-सरसों की बुवाई 5,365 हैक्टेयर अधिक हुई।
इस वर्ष लगभग 15 प्रतिशत गेहूं-जो की बुवाई समय से एक माह पहले हुई, जिसका फसल पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। हालांकि, जनवरी के प्रथम सप्ताह में आने वाले कोहरे और सर्दी से नुकसान कम होने की संभावना है। किसानों को समय-समय पर विभाग द्वारा बुवाई, तापमान, उर्वरक और बीज की जानकारी दी जाती रही है, लेकिन कुछ किसान अपनी विधि से खेती कर पैदावार घटा देते हैं।
रामराज मीना, सयुंक्त निदेशक कृषि (विस्तार), जिला दौसा