
Rajesh Pilot son Sachin Come Dausa : पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता राजेश पायलट की 26वीं पुण्यतिथि गुरुवार को राजेश पायलट स्मारक, जिरोता पर श्रद्धापूर्वक मनाई जाएगी। पुण्यतिथि कार्यक्रम को लेकर स्मारक स्थल पर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। श्रद्धांजलि सभा में कांग्रेस नेता सचिन पायलट सहित प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के कांग्रेस नेताओं तथा हजारों कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना है। विधायक दीनदयाल बैरवा ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत भंडाना स्थित राजेश पायलट स्मृति स्थल पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर की जाएगी।
इसके बाद दौसा के जिरोता स्थित राजेश पायलट स्मारक पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित होगी। सभा में सर्वधर्म प्रार्थना का आयोजन किया जाएगा तथा दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत नेता को श्रद्धासुमन अर्पित किए जाएंगे। गर्मी को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशाल पांडाल लगाया गया है। पांडाल में जगह-जगह कूलर, पंखे, पेयजल और शीतल पेय की व्यवस्था की गई है।
बांदीकुई नगर एवं ब्लॉक कांग्रेस कमेटी की और से 11 जून को किसान नेता राजेश पायलट की पुण्यतिथि सुबह साढ़े 8 बजे राजेश पायलट भवन भांडेड़ा रोड बांदीकुई में प्रेरणा दिवस के रूप में मनाई जाएगी। नगर अध्यक्ष कैलाश बैरवा एवं शहर मंडल अध्यक्ष अशोक काठ ने बताया कि इससे पूर्व सुबह 8 बजे राजेश पायलट पीजी कॉलेज बांदीकुई में राजेश पायलट की मूर्ति पर माल्यार्पण किया जाएगा। पायलट भवन में कार्यक्रम के बाद 9 बजे कार्यकर्ता पायलट स्मृति स्थल भंडाना दौसा में श्रद्धांजलि सभा के लिए रवाना होंगे।
राजेश पायलट का जन्म 10 फरवरी, 1945 को उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर के वेदपुरा गांव में हुआ था। उनका नाम राजेश्वर प्रसाद बिधुड़ी था। पिता का नाम जय दयाल सिंह था। राजेश ने मेरठ विश्वविद्यालय, मेरठ और नई दिल्ली से फ्लाइंग एजूकेशन में अपना ग्रेजुएशन पूरा किया। राजेश पायलट ने 12 मार्च 1974 को रमा पायलट से शादी की। पायलट के 2 बच्चे- सचिन पायलट (पुत्र) और सारिका पायलट (पुत्री) हैं। सचिन पायलट भी पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए राजनीति कर रहे हैं। और आजकल सुर्खियों में हैं।
राजेश्वर प्रसाद यानि राजेश पायलट का 29 अक्टूबर, 1966 को भारतीय वायुसेना में एक पायलट अधिकारी के रूप में चयन हुआ। वर्ष 1979 में पायलट ने अपने दोस्त राजीव गांधी (भारत के पूर्व प्रधानमंत्री) के प्रभाव में इस्तीफा दे दिया और राजनीति के तरफ कदम बढ़ा दिए। उस वक्त पायलट जैसलमेर में स्क्वाड्रन लीडर के पद पर तैनात थे।
पहले उनका नाम राजेश्वर प्रसाद बिधुड़ी था। पर जब वे 1979-1980 में भरतपुर में कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर नामांकन भरने गए, तो स्थानीय कार्यकर्ताओं के सुझाव पर अपना नाम बदल कर राजेश पायलट कर लिया।
1- 7वीं लोकसभा में भरतपुर से चुनाव जीता। राजेश्वर प्रसाद ने अपना नाम बदल कर राजेश पायलट रख लिया।
2- राजस्थान के दौसा से 8वीं लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीता।
3- भारत सरकार में 1985-1989 के बीच भूतल परिवहन मंत्री रहे।
4- 1987 में जय जवान जय किसान ट्रस्ट की स्थापना की।
5- 10वीं लोकसभा चुनाव जीते। 1991-1993 में दूरसंचार मंत्री रहे।
6- 1992 में कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य बने।
7- आंतरिक सुरक्षा मंत्री के रूप में 1993-1995 में कार्य किया।
8- 1995-1996 में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री रहे।
9- 11वीं लोकसभा के चुने गए।
10- 12वीं लोकसभा के लिए दोबारा चुने गए।
11- 13वीं लोकसभा के लिए चुने गए।
12- वे रक्षा समिति और लोक लेखा समिति के सदस्य रहे।
भरतपुर से मिली शानदार सफलता और लोकप्रियता के बाद, राजेश पायलट ने खुद को राजस्थान की राजनीति में पूरी तरह समर्पित कर दिया। इसके बाद वे दौसा लोकसभा क्षेत्र से 1984 से लगातार पांच बार सांसद चुने गए और किसानों व मजदूरों के प्रबल समर्थक के रूप में जाने गए। राजेश पायलट की 11 जून 2000 को 55 साल की उम्र में जयपुर के पास भंडाना गांव में हुई एक कार दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई।