दौसा

Rana Sanga Memorial: बसवा में राणा सांगा के जिस स्मारक पर पहुंचे रविंद्र सिंह भाटी, जानें उससे जुड़ी कुछ खास बातें

Ravindra Singh Bhati Baswa Tour: शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी आज दौसा जिले के दौरे पर है। वे यहां बसवा स्थि​त वीर शिरोमणि महाराणा सांगा स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। जानें राणा सांगा के स्मारक से जुड़ी खास बातें

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Apr 02, 2025
Ravindra-Sint-Bhati

दौसा। शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी आज दौसा जिले के दौरे पर है। वे यहां बसवा स्थि​त वीर शिरोमणि महाराणा सांगा स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। विधायक रविंद्र सिंह भाटी का यह दौरा राजनीतिक लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। क्योंकि हाल ही में सांसद रामजी लाल सुमन ने राणा सांगा को लेकर विवादित बयान दिया था। जिसके बाद से प्रदेश में यह मुद्दा गरमाया हुआ है। ऐसे में शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी का महाराणा सांगा स्मारक पर जाना भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी सुबह 10 बजे जयपुर से बसवा के लिए रवाना हुए। इस दौरान कई जगह ​विधायक का भव्य स्वागत किया गया। जयपुर के 52 फुट हनुमानजी पहुंचने पर कार्यकर्ताओं ने माला पहनाकर स्वागत किया। इसके बाद उनका काफिला कानोता, बस्सी और दौसा में रूका। यहां पर भी भाटी के समर्थक उनके स्वागत के लिए मौजूद रहे। माना जा रहा है कि विधायक अपने समर्थकों के साथ शाम को बसवा पहुंचे, जहां पर उन्होंने महाराणा सांगा स्मारक पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

बसवा से राणा सांगा का खास नाता

बता दें कि दौसा जिले के बसवा कस्बे से मेवाड़ के महान योद्धा महाराणा सांगा का गहरा नाता रहा है। दरअसल, साल 1527 में महाराणा सांगा और मुगल शासक बाबर के बीच ऐतिहासिक खानवा का युद्ध हुआ था, जिसमें राणा सांगा पराजित हुए थे। खानवा के युद्ध में राणा सांगा को गंभीर चोटें आईं थी। जिसके बाद वे अपने सैनिकों के साथ बसवा आ गए थे। यहां उन्होंने अपने घावों का इलाज कराया था और कुछ समय के लिए विश्राम किया था।

बसवा में उनके ठहराव का यह स्थान आज राणा सांगा का चबूतरा के नाम से जाना जाता है, जो उनकी वीरता और संघर्ष की याद दिलाता है।​ यह स्थान न केवल महाराणा सांगा के उपचार और विश्राम का साक्षी है, बल्कि उनकी अंतिम गतिविधियों का भी गवाह है। आज भी यह चबूतरा पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जो महाराणा सांगा की वीरता और बलिदान की कहानी को जीवंत रखता है।​

Updated on:
02 Apr 2025 07:45 pm
Published on:
02 Apr 2025 03:00 pm