दौसा

Manoharpur-Dausa Highway: NHAI ने दिया झटका, मनोहरपुर-दौसा फोरलेन हाईवे का टेंडर निरस्त, ग्रामीणों में आक्रोश

Rajasthan Highway Project: मनोहरपुर-दौसा हाईवे के फोरलेन निर्माण का टेंडर निरस्त होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है। लगातार बढ़ते हादसों के बीच लोगों ने हाईवे को जल्द फोरलेन बनाने की मांग दोहराई है।

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Apr 12, 2026
मनोहरपुर दौसा नेशनल हाईवे। फोटो- पत्रिका

गठवाड़ी। जयपुर-दिल्ली, जयपुर-आगरा और जयपुर-बांदीकुई एक्सप्रेस-वे से जुड़े मनोहरपुर-दौसा नेशनल हाईवे के फोरलेन निर्माण को लेकर क्षेत्र के ग्रामीणों को अब और इंतजार करना पड़ेगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने इस परियोजना की टेंडर प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है।

इस संबंध में एनएचएआइ के महाप्रबंधक (तकनीकी), राजस्थान डिवीजन वीएस मीणा ने आदेश जारी किए हैं, हालांकि निरस्तीकरण के कारणों का उल्लेख नहीं किया गया है। टेंडर निरस्त होने से हाईवे से जुड़े दर्जनों गांवों के लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से इस मार्ग के फोरलेन बनने की उम्मीद थी, जिससे आवागमन सुरक्षित और सुगम हो सके, लेकिन अब टेंडर रद्द होने से उन्हें निराशा हाथ लगी है।

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आए दिन हो रहे हादसे

गठवाड़ी पंचायत प्रशासक बाबूलाल मीणा, धौला पंचायत प्रशासक प्रकाश गोडल्या, बोबाड़ी पंचायत प्रशासक दीपिका चौधरी और केलाकाबास पंचायत प्रशासक ममता महफर मीणा ने बताया कि डीपीआर तैयार होने के बाद जब टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई थी, तब लोगों में काफी उम्मीद जगी थी। ग्रामीणों ने कहा कि वर्तमान में दो लेन के इस हाईवे पर डिवाइडर नहीं होने और तेज गति से ओवरटेकिंग के कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं। उन्होंने जनभावनाओं को देखते हुए हाईवे को शीघ्र फोरलेन में परिवर्तित करने की मांग की है।

टेंडर खोलने की जगह निरस्त

जानकारी के अनुसार एनएचएआइ ने 2 जनवरी को टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी। 17 फरवरी तक निविदाएं आमंत्रित की गई थीं और 18 फरवरी को उन्हें खोलने का कार्यक्रम निर्धारित था। इसके बाद समय बढ़ाकर 13 मार्च और फिर 27 अप्रेल कर दिया गया। लगातार तिथियां बढ़ने के बाद अचानक टेंडर निरस्त कर दिए जाने से ग्रामीणों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

15 माह में 85 से अधिक मौत

मनोहरपुर-दौसा हाईवे पर रायसर, आंधी, मनोहरपुर और सैंथल थाना क्षेत्रों में पिछले 15 महीनों के दौरान 85 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 130 से अधिक लोग घायल हुए हैं। पिछले साढ़े चार वर्षों में सबसे अधिक हादसे रायसर क्षेत्र में दर्ज किए गए हैं, जहां 130 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते हाईवे को फोरलेन में विकसित किया जाता, तो कई हादसों को रोका जा सकता था। अब टेंडर निरस्त होने के बाद एक बार फिर से परियोजना के भविष्य को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बन गई है।

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