दौसा

Vasant Mahotsav : राजस्थान में चांदी के भावों में भारी बढ़ोतरी, रघुनाथजी के ऐतिहासिक रथ को कड़ी सुरक्षा के घेरे में लिया, जानें क्यों?

Vasant Mahotsav : राजस्थान सहित पूरे देश में चांदी के भावों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए दौसा में रघुनाथजी मंदिर के ऐतिहासिक रथ की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। वजह क्या है पूरी कहानी जानिए।

2 min read
Jan 22, 2026
रघुनाथजी जी का चांदी जड़ित ऐतिहासिक रथ। फोटो पत्रिका

Vasant Mahotsav : चांदी के भावों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए रघुनाथजी मंदिर के ऐतिहासिक रथ की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। बसंत महोत्सव के दौरान उपयोग में आने वाला यह रथ चांदी से सुसज्जित है, जिसकी कीमत मौजूदा बाजार भाव के अनुसार एक करोड़ साठ लाख रुपए से अधिक है। लकड़ी से निर्मित इस रथ पर करीब 50 किलो चांदी का आकर्षक कार्य किया गया है।

दौसा शहर में बसंत पंचमी मेला 19 जनवरी से शुरू हो चुका है, जिसकी परंपरागत शुरुआत रघुनाथजी की भव्य रथ यात्रा से होती है। रघुनाथजी मोहल्ले स्थित मंदिर से भगवान रघुनाथजी रथ पर सवार होकर लगभग तीन किमी की यात्रा तय कर बारादरी मेला मैदान में विराजते हैं।

ये भी पढ़ें

Rajasthan Panchayat Elections : राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 15 अप्रेल तक होंगे पंचायत चुनाव, 60 से अधिक याचिकाएं खारिज

भारी भीड़ को देखते हुए बढ़ाई सुरक्षा

महोत्सव की अवधि में यह रथ बारादरी मेला मैदान में ही खड़ा रहता है। चांदी की ऊंची कीमत और रथ के धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए मंदिर प्रशासन व स्थानीय प्रशासन की ओर से सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। रथ और उसके आस-पास निगरानी बढ़ा दी गई है।

माघ माह की छठ के दिन इसी रथ के माध्यम से रघुनाथजी, माता जानकी, लक्ष्मणजी और नृसिंहजी पुनः अपने निज मंदिर में विराजमान होंगे। बसंत महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना को देखते हुए यह व्यवस्था की गई है।

दिन-रात जाग रहे सुरक्षाकर्मी

रथ की सुरक्षा तो कई साल से होती आ रही है, लेकिन इस बार सुरक्षा और अधिक की गई है। एक हेड कांस्टेबल व चार कांस्टेबलों का जाब्ता रथ की सुरक्षा में लगाया गया है। यहां तैनात कर्मचारियों ने बताया कि वे बारी-बारी से दिन-रात ड्यूटी कर रहे हैं। इनमें बंदूकधारी जवान भी शामिल हैं। मेले में शांति व्यवस्था को लेकर आरएसी के जवान भी तैनात किए गए हैं।

करीब सौ साल पुरानी परंपरा

मेले में आने वाले लोग खरीदारी के साथ ही चांदी जड़ित लकड़ी के इस रथ को देखने भी पहुंच रहे हैं। इतिहासकार सुआलाल तिवाड़ी ने बताया कि रथ की यह परंपरा करीब 400 साल से भी अधिक पुरानी है।

रघुनाथ महाराज सेवा समिति के राममनोहर चौकड़ायत ने बताया कि इस रथ को दो बैलों की सहायता से मेला मैदान तक लाया जाता है।

राजस्थान से जुड़ी हर ताज़ा खबर, सीधे आपके WhatsApp पर
जुड़ें अभी
: https://bit.ly/4bg81fl

ये भी पढ़ें

PM Jan Aushadhi Kendra : राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला, सभी जिला अस्पतालों में प्रधानमंत्री जनऔषधि केन्द्र होंगे शुरू, आदेश जारी

Published on:
22 Jan 2026 08:16 am
Also Read
View All

अगली खबर