देहरादून

यूसीसी का असर: उत्तराखंड की महिलाओं के लिए न्याय हुआ आसान, सीधे दर्ज करा सकेंगी मुकदमे

Uttarakhand News: उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने के बाद अब मामलों की सीधी एफआईआर दर्ज करने का रास्ता साफ हो गया है। सीसीटीएनएस सिस्टम को पूरी तरह अपडेट कर दिया गया है।

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May 15, 2026
उत्तराखंड की महिलाओं के लिए न्याय हुआ आसान

UCC Uttarakhand News: उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने के बाद पीड़ित महिलाओं में एक नई उम्मीद जगी है। वर्षों से शोषण और सामाजिक दबाव झेल रही कई महिलाओं ने इस कदम को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि अब उन्हें न्याय पाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई और भटकाव का सामना नहीं करना पड़ेगा। कई पीड़ितों ने इसे राहत की किरण बताया है।

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साहसिक कदम का आभार

पीड़ित महिलाओं ने प्रदेश सरकार के इस फैसले के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल साहसिक है बल्कि सामाजिक न्याय की दिशा में निर्णायक भी है। पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में लिया गया यह निर्णय महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करता है और कानून व्यवस्था पर भरोसा बढ़ाता है।

शिकायत के बाद तुरंत कार्रवाई और चार्जशीट

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार यूसीसी लागू होने के बाद मामलों में कार्रवाई और तेज हो गई है। एक मामले में शिकायत दर्ज होने के तुरंत बाद मुकदमा दर्ज किया गया और एक माह के भीतर चार्जशीट भी दाखिल कर दी गई। पीड़ित पक्ष ने पुलिस और जांच अधिकारियों का भी धन्यवाद किया, जिन्होंने समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की।

उत्तराखंड बना पहला राज्य

उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है जहां समान नागरिक संहिता लागू की गई है। वर्ष 2022 के चुनाव से पहले मुख्यमंत्री धामी ने इसका वादा किया था। सत्ता में वापसी के बाद 27 मई 2022 को विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर विधेयक तैयार हुआ और बाद में विधानसभा व राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद इसे लागू किया गया।

आंकड़ों में बदलाव

सरकारी आंकड़ों के अनुसार यूसीसी पोर्टल पर अब तक 4.39 लाख विवाह पंजीकृत किए जा चुके हैं। इसके अलावा 351 विवाह विच्छेद और 84 लिव-इन संबंधों के मामले दर्ज हुए हैं। चार मामलों में लिव-इन संबंध समाप्त करने की जानकारी भी पोर्टल पर दर्ज की गई है, जिससे डिजिटल ट्रैकिंग व्यवस्था मजबूत हुई है।

सीसीटीएनएस पर पूरा यूसीसी ऐक्ट अपडेट

अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं सिस्टम (सीसीटीएनएस) पर पहले यूसीसी की धाराएं पूरी तरह उपलब्ध नहीं थीं, जिससे कुछ मामलों में तकनीकी दिक्कतें आईं। अब पूरा ऐक्ट अपडेट कर दिया गया है, जिसके बाद प्राथमिकी दर्ज करते समय यूसीसी की धाराएं सीधे जोड़ी जा सकेंगी।

हरिद्वार केस से शुरू हुआ तकनीकी अपडेट

हरिद्वार के बुग्गावाला थाने में दर्ज एक मामले के दौरान तकनीकी समस्या सामने आई थी, जब यूसीसी की धाराएं सिस्टम में उपलब्ध नहीं थीं। इस वजह से शुरुआती एफआईआर में अन्य कानूनों की धाराएं लगाई गईं, लेकिन बाद में जांच पूरी होने पर चार्जशीट में यूसीसी की धारा 32(1)(2) और 32(1)(3) जोड़ी गईं। इसके बाद पूरे सिस्टम को अपडेट कर दिया गया, जिससे भविष्य में ऐसी समस्या न आए।

Published on:
15 May 2026 09:01 pm
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