देवास

3 बार तैरी भगवान नृसिंह की पाषाण प्रतिमा, ‘अगला साल रहेगा खुशहाल’, देवास में डोल ग्यारस की धूम

Dol Gyaras celebration : हाटपीपल्या में धूमधाम से मनाया गया डोल ग्यारस महोत्सव। दर्शन करने उमड़ा भक्तों का सैलाब। तीन बार भमोरी नदी में तैरी भगवान नृसिंह की पाषाण प्रतिमा। मान्यता है कि, आने वाला पूरा साल खुशहाल रहेगा।
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Dol Gyaras celebration
3 बार तैरी भगवान नृसिंह की पाषाण प्रतिमा (फोटो सोर्स: Patrika)

Dewas News :मध्य प्रदेश के देवास जिले के अंतर्गत आने वाले हाटपीपल्या नगर में मंगलवार को डोल ग्यारस महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। नगर गौरव दिवस के रूप में मनाए जाने वाले इस पर्व पर हाटपीपल्या समेत आसपास के ग्रामीण अंचलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु नगर पहुंचे। सदियों पुरानी जलझूलनी एकादशी की परंपरा के तहत नगर के विभिन्न मंदिरों से भगवान के डोल निकाले गए। मुख्य आकर्षण भगवान नृसिंह का डोल रहा, जिसके दर्शन एवं जल विहार के लिए हजारों श्रद्धालु नृसिंह घाट पहुंचे।

दोपहर करीब 3:30 बजे मंदिर प्रांगण से भगवान नरसिंह का डोल नृसिंह घाट की ओर रवाना हुआ। गाजे-बाजे के साथ भगवान नृसिंह का डोल एवं नगर के अन्य मंदिरों के डोल शाम करीब 5:40 बजे नृसिंह घाट पहुंचे। डोल के घाट पर पहुंचते ही हजारों की संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं ने भगवान नृसिंह के जयकारों से वातावरण गुंजायमान कर दिया। नृसिंह घाट पर पहुंचने के बाद नृसिंह मंदिर के मौजूदा पंडित अविनय वैष्णव समेत अन्य मंदिरों के पुजारियों द्वारा भमोरी नदी में स्नान किया गया। इसके बाद सूर्य नारायण को अर्घ्य देकर नदी का पूजन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान नृसिंह एवं विभिन्न डोलों में विराजमान बाल कृष्ण जी का पूजन किया गया।

जल विहार की विशेष मान्यता

संध्या बेला में भगवान श्री नृसिंह के अवतरण काल के समय दिव्य पाषाण विग्रह को डोल से बाहर निकालकर जल विहार के लिए भमोरी नदी में ले जाया गया। भगवान के दर्शन की एक झलक पाने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। परंपरा के अनुसार, भगवान नृसिंह के साढ़े सात किलो वजनी पाषाण विग्रह को नदी की लहरों में तीन बार जल विहार कराया गया। मान्यता के अनुसार, विग्रह के नदी की लहरों पर तैरने की संख्या के आधार पर आगामी वर्ष की शुभता का आकलन किया जाता है।

तीन बार हुआ भगवान का जल विहार

मान्यता है कि, तीन बार विग्रह के तैरने पर पूरा वर्ष शुभ, दो बार तैरने पर आठ माह और एक बार तैरने पर चार माह शुभ रहने का संकेत माना जाता है। वहीं, तीनों बार विग्रह के जल में समा जाने को कठिन समय का संकेत माना जाता है। इस साल भगवान नृसिंह का दिव्य विग्रह तीनों बार नदी की लहरों पर तैरता रहा। इसे देखकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और प्रसन्नता का वातावरण देखने को मिला।

Updated on:
22 Sept 2026 08:10 pm
Published on:
22 Sept 2026 08:09 pm