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Dewas news: पापा छोड़ गए, फिर 12 दिन बाद मम्मी भी, बहन बोली- ‘भाई को नहीं होने दूंगी कोई कमी…’

Raksha Bandhan Special: श्रुति झंवर ने कोविड में माता-पिता खोने के बाद छोटे भाई की जिम्मेदारी संभाली और संघर्ष करते हुए बेकरी शुरू की।
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Aug 27, 2026
भाई के साथ श्रुति झंवर (Photo Source - Patrika)
भाई के साथ श्रुति झंवर (Photo Source - Patrika)

Dewas news: रक्षाबंधन सिर्फ राखी बांधने और भाई से रक्षा का वचन लेने का पर्व नहीं है। कई बार जिंदगी ऐसे मोड़ पर ला खड़ा करती है, जहां बहन ही भाई की मां, पिता और सबसे बड़ी ताकत बन जाती है। देवास के बालाजी नगर निवासी 23 वर्षीय श्रुति झंवर की कहानी इसी रिश्ते की ताकत और त्याग की मिसाल है। कोरोना की दूसरी लहर में महज 12 दिनों के भीतर माता-पिता को खोने के बाद श्रुति ने अपने छोटे भाई सौम्य को अकेला नहीं पडऩे दिया। उन्होंने खुद संघर्षों का सामना किया और भाई के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली।

12 दिन में छिन गया माता-पिता का साया

श्रुति का परिवार पहले इंदौर में रहता था। पिता रंजन झंवर किराने की दुकान चलाते थे। कोरोना की दूसरी लहर परिवार के लिए ऐसा दुख लेकर आई, जिसने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी। 26 अप्रैल 2021 को पिता का निधन हुआ और महज 12 दिन बाद 8 मई को मां ममता झंवर भी कोविड के कारण चल बसीं। अचानक माता-पिता का साया उठने के बाद श्रुति और छोटे भाई सौम्य के सामने जीवन की सबसे बड़ी चुनौती खड़ी हो गई। इसके बाद दोनों देवास में नाना रामनारायण कचोलिया के यहां आ गए। परिवार के सहयोग के साथ श्रुति ने भाई की जिम्मेदारी संभालने का फैसला किया। करीब एक महीने बाद ही उन्होंने निजी नौकरी शुरू कर दी, ताकि भाई की पढ़ाई और परवरिश में कोई कमी न आए।

नौकरी से बेकरी तक, अब शेफ बनने की तैयारी

श्रुति ने नौकरी के साथ अपने पैरों पर खड़े होने का प्रयास जारी रखा। बाद में उन्होंने बालाजी नगर में अपनी बेकरी शुरू की। फिलहाल बेकरी की जिम्मेदारी उनके मामा संभाल रहे हैं। अपने सपनों को भी भाई के भविष्य से जोड़ते हुए श्रुति अब दिल्ली में पेस्ट्री शेफ का डिप्लोमा कर रही हैं। वह कहती हैं कि भाई के बेहतर भविष्य के लिए वह दिल्ली आई हैं। कोर्स पूरा करने के बाद दिल्ली या विदेश में नौकरी करने का लक्ष्य है, ताकि सौम्य को सुरक्षित और समृद्ध भविष्य दे सकें।

भाई के सपनों में देख रही अपना भविष्य

आज सौम्य मामा के साथ रहकर निजी स्कूल में कक्षा छठी में पढ़ रहा है। श्रुति उससे दूर रहकर भी उसकी पढ़ाई और भविष्य को लेकर लगातार प्रयास कर रही हैं। माता-पिता की कमी पूरी करना संभव नहीं, लेकिन वह भाई को हर वह खुशी देना चाहती हैं जो उसके हिस्से में होनी चाहिए।

दिया ये संदेश

इस रक्षाबंधन पर श्रुति की कहानी बताती है कि कभी-कभी राखी की डोर सिर्फ कलाई नहीं बांधती, बल्कि एक बहन को भाई की पूरी जिंदगी की जिम्मेदारी से जोड़ देती है।

Updated on:
27 Aug 2026 04:00 pm
Published on:
27 Aug 2026 04:00 pm