धमतरी

पत्रिका एक्सक्लूसिव: गुलाबी फ्लेमिंगो से गुलजार हुआ गंगरेल, 502 प्रजातियों में शामिल हुआ नया मेहमान

Chhattisgarh Birds: छत्तीसगढ़ के गंगरेल जलाशय में गुलाबी फ्लेमिंगो यानी ग्रेटर फ्लेमिंगो की मौजूदगी दर्ज की गई है। इसके साथ ही प्रदेश में दर्ज पक्षियों की 502 प्रजातियों की सूची में एक नया नाम जुड़ गया है।
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Oct 19, 2026
Greater Flamingo
गंगरेल में फ्लेमिंगो की दस्तक (फोटो सोर्स- AI)

धमतरी@भूपेंद्र पटवा। Pink Flamingo: प्रदेश की जैव विविधता और पर्यावरण प्रेमियों के लिए सुखद खबर सामने आई है। गुजरात के कच्छ और ओडिशा की चिल्का झील की शान माने जाने वाले अति-सुंदर गुलाबी पक्षी 'फ्लेमिंगो' (राजहंस) अब छत्तीसगढ़ में भी नजर आने लगे हैं। वन्यजीव फोटोग्राफरों और पक्षी प्रेमियों ने कांकेर और धमतरी जिले की सीमा पर स्थित गंगरेल जलाशय के तटों पर इनके झुंड को कैमरे में कैद किया है। इसके साथ ही राज्य में दर्ज पक्षियों की कुल 502 प्रजातियों की सूची में फ्लेमिंगो के रूप में एक और नया व खूबसूरत मेहमान शामिल हो गया है।

पक्षी विशेषज्ञ गोपी किशन साहू, अमर मुलवानी, एएमके भरोस और योगिता साहू के शोध दल ने जून 2025 से मार्च 2026 के बीच गंगरेल के हरफर, पटौद, चिखली और फुटाहामुड़ा क्षेत्रों में इनका अध्ययन किया। 26 जून 2025 को गंगरेल में पहली बार 8 'ग्रेटर फ्लेमिंगो' देखे गए, जिनकी संख्या 28 जून को बढ़कर 11 हो गई। 1 मार्च 2026 को फुटाहामुड़ा क्षेत्र में 7 फ्लेमिंगो का एक और झुंड नजर आया। विशेषज्ञों के अनुसार, चिल्का झील (ओडिशा) से रण ऑफ कच्छ (गुजरात) की ओर लौटते समय ये प्रवासी पक्षी गंगरेल जलाशय को अपना ठहराव (स्टॉपओवर) बना रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि अप्रैल के दौरान इनकी संख्या और अधिक बढ़ जाती है।

बर्ड-टूरिज्म का बड़ा केंद्र बनने की क्षमता

गंगरेल जलाशय न केवल फ्लेमिंगो, बल्कि स्मॉल प्रैटिनकोल, केंटीश प्लोवर और लिटिल टर्न जैसी दुर्लभ प्रजातियों के लिए भी प्रजनन स्थल (नेस्टिंग ग्राउंड) बन रहा है। यदि शासन इसे व्यवस्थित रूप से संरक्षित करे, तो यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय 'बर्ड-टूरिज्म' के नक्शे पर उभर सकता है।

टापू पर शरण लेने को मजबूर

अध्ययन में एक चिंताजनक बात भी सामने आई है। सुरक्षा के अभाव और स्थानीय स्तर पर शिकारियों के डर से ये पक्षी मुख्य तटों के बजाय तट से 2 किलोमीटर दूर बने बीच के टापुओं पर छुपकर रहने को मजबूर हैं। विशेषज्ञों ने वन विभाग से मांग की है कि गंगरेल के इन प्रमुख हिस्सों में शिकार पर तत्काल पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए और इस पूरे क्षेत्र को 'संरक्षित वेटलैंड' घोषित किया जाए, ताकि यह नया मेहमान छत्तीसगढ़ के पर्यावरण को और समृद्ध कर सके।

Updated on:
19 Oct 2026 08:21 am
Published on:
19 Oct 2026 08:21 am