
Railway Tunnel Construction: मालवा को गुजरात से सीधे जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन परियोजना (Indore Dahod rail line project) अब तेजी से अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रही है। परियोजना की सबसे चुनौतीपूर्ण कड़ी मानी जाने वाली 2957 मीटर लंबी सुरंग में लाइनिंग (कंक्रीट अस्तर) का कार्य शत-प्रतिशत पूरा हो गया है। इसके साथ ही अब सुरंग के भीतर बैलास्टलेस ट्रैक (बिना गिट्टी वाली पटरियां) बिछाने, ड्रेनेज सिस्टम, वेंटिलेशन और अन्य सिविल कार्य तेज गति से चल रहे है।
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि यह सुरंग न केवल परियोजना की तकनीकी उपलब्धि है, बल्कि मध्यप्रदेश और गुजरात के बीच बेहतर रेल संपर्क की नई आधारशिला भी बनेगी। पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार के अनुसार सुरंग की खुदाई पूरी होने के बाद सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले लाइनिंग कार्य को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इससे सुरंग को दीर्घकालिक मजबूती, स्थायित्व और सुरक्षित संचालन सुनिश्चित होगा। अब परियोजना का फोकस ट्रैक बिछाने और सुरक्षा से जुड़े ढांचागत कार्यों को तय समय में पूरा करने पर है।
सुरंग को केवल रेल आवागमन के लिए ही नहीं, बल्कि किसी भी आपात स्थिति से सुरक्षित तरीके से निपटने के लिहाज से भी तैयार किया जा रहा है। इसके लिए सुरंग के भीतर रिफ्यूज निच (आपातकालीन शरण स्थल) बनाए जा रहे हैं, ताकि दुर्घटना की स्थिति में यात्री सुरक्षित रह सकें। त्वरित राहत एवं बचाव के लिए रेस्क्यू शाफ्ट तैयार किए जा रहे हैं। ताजी हवा के सतत प्रवाह के लिए वेंटिलेशन डक्ट बनाए जा रहे हैं, जबकि धुआं और घुटन रोकने के लिए हेवी-ड्यूटी एग्जॉस्ट फैन लगाए जाएंगे। इसके साथ ही जलभराव रोकने के लिए दोनों ओर साइड ड्रेन और इनवर्ट ड्रेन का अधिकांश निर्माण कार्य भी पूरा हो चुका है।
इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन केवल एक नई रेलवे परियोजना नहीं, बल्कि मालवा और गुजरात के बीच आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक विकास की नई जीवनरेखा साबित होगी। परियोजना पूरी होने के बाद इंदौर, धार और झाबुआ सहित आदिवासी अंचल का गुजरात से सीधा और तेज रेल संपर्क स्थापित होगा। इससे यात्रियों का सफर आसान होने के साथ-साथ माल परिवहन को भी नई गति मिलेगी। उद्योग, व्यापार और पर्यटन क्षेत्र को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा के अनुसार आगे बढ़ रहा है और सुरंग को जल्द ही ट्रेनों के संचालन के लिए तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
रेलवे ने सुरंग के भीतर अत्याधुनिक बैलास्टलेस ट्रैक तकनीक अपनाई है, जिससे ट्रैकका रखरखाव कम होगा और ट्रेनों का संचालन अधिक सुरक्षित व सुगम रहेगा। अब तक 1216 मीटर बैलास्टलेस ट्रैक बिछाया जा चुका है, जबकि 810 मीटर हिस्से में यह कार्य तेजी से जारी है। इसके अलावा प्लेन सीमेंट कंक्रीट (पीसीसी) की पहली लेयर का 2007 मीटर तथा अंतिम लेयर का 1470 मीटर कार्य पूरा हो चुका है। शेष 740 मीटर में पीसीसी निर्माण प्रगति पर है। रेलवे ने कट एंड कवर सेक्शन में ओवर्ट रिइनफोर्समेंट और लाइनिंग का कार्य भी पूर्ण कर लिया है, जिससे परियोजना के इस हिस्से की संरचनात्मक मजबूती सुनिश्चित हो गई है।
रेलवे निर्माण विभाग सुरंग के शेष हिस्से में ड्रेनेज, बैकफिलिंग और अन्य सिविल कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए आधुनिक मशीनरी और उन्नत तकनीकों का उपयोग कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
अब तक 1216 मीटर बैलास्टलेस ट्रक का निर्माण पूरा किया जा चुका है, जबकि 810 मीटर में ट्रैक बिछाने का कार्य तेजी से जारी है। इसके अलावा, पीसीसी (प्लेन सीमेंट कंक्रीट) की पहली लेयर का 2007 मीटर और फाइनल लेयर का 1470 मीटर कार्य पूर्ण हो चुका है, तथा 740 मीटर हिस्से में पीसीसी निर्माण का काम अभी प्रगति पर है। निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा में आगे बढ़ रहा है और सुरंग को जल्द ही ट्रेनों के संचालन के लिए तैयार करने का लक्ष्य है।- मुकेश कुमार, पीआरओ, रतलाम मंडल पश्चिम रेलवे
सुरंग की कुल लंबाई: 2957 मीटर
लाइनिंग कार्यः100 प्रतिशत पूर्ण
बैलास्टलेस ट्रैकः 1216 मीटर
पूर्ण, 810 मीटर प्रगति पर
पीसीसी प्रथम लेयरः 2007 मीटर पूर्ण
पीसीसी अंतिम लेयरः 1470 मीटर पूर्ण
पीसीसी शेष कार्यः 740 मीटर प्रगति पर
कट एंड कथर सेक्शनः रिइनफोर्समेंट एवं लाइनिंग पूर्ण
मालवा और गुजरात के बीच रेल संपर्क होगा अधिक तेज और सीधा।
आदिवासी अंचल को बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी।
माल ढुलाई की लागत और समय में कमी आएगी।
उद्योग, व्यापार और पर्यटन को नई रफ्तार मिलेगी।
अत्याधुनिक सुरक्षा मानकों के साथ सुरक्षित रेल संचालन सुनिश्चित होगा ।