धर्म-कर्म

14 सितंबर को तीज के साथ गणेशोत्सव, जानें कब और कैसे होगी गणेश स्थापना, पूजा और व्रत की तिथि और विधि

Hartalika Teej-Ganesh Chaturthi 2026: 14 सितंबर को हरितालिका तीज और अगले दिन गणेश स्थापना के साथ विशेष योग बन रहा है। ज्योतिषीय मान्यता में ये 10 दिन सुख-सौभाग्य, मनोकामना और विवाह बाधा दूर करने के लिए खास हैं।
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Sep 09, 2026
14 september 2026 hartalika teej-ganeshotsav ganesh sthapana vidhi
Hartalika Teej-Ganesh Chaturthi 2026: 14 सितंबर को साथ पड़ेगी तीज और गणेश चतुर्थी (फोटो सोर्स- Chatgpt)

Ganeshotsav Ganesh sthapana vidhi: इस बार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया से चतुर्थी तक धर्म और साधना का विशेष संयोग बन रहा है। 14 सितंबर को तृतीया-युक्त चतुर्थी में हरितालिका तीज का व्रत होगा, अगले दिन पारणा किया जाएगा, जबकि चतुर्थी पर ब्रह्म योग में गणेशजी की स्थापना होगी। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार तीज का संयोग सुख सौभाग्यवर्धक है। गणेशोत्सव के 10 दिन विघ्न निवारण, मनोकामना पूर्ति व मांगलिक कार्य की बाधाएं दूर करने के लिए विशेष साधना का है।

ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला के अनुसार, चतुर्थी से युक्त तृतीया का संयोग सामान्य से अधिक फलदायी माना है। भविष्य पुराण में हेमाद्री के मत का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया यह तृतीया वैदिक अनुष्ठान और पूजन के लिए विशेष मानी गई है। श्रद्धा और संकल्प के साथ व्रत करने से सुख-शांति और आर्थिक समृद्धि की कामना की जाती है।

विवाह में आ रही बाधा के लिए विशेष साधना

जिन युवक-युवतियों के विवाह या अन्य मांगलिक कार्यों में बाधा आ रही है, उनके लिए गणेशोत्सव के 10 दिन विशेष साधना का अवसर माने गए हैं। गणेश सहस्रनाम स्तोत्र के पाठ के साथ हवनात्मक अनुष्ठान किया जा सकता है। इसके साथ 10 दिन तक दूर्वा और मोदक अर्पित करने का क्रम रखने की भी मान्यता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार इससे विघ्न दूर होते हैं और अभीष्ट कार्य की सिद्धि की कामना की जाती है।

10 दिन, गणेशजी के 10 स्वरूपों की साधना

गणेशोत्सव के 10 दिनों में गणेशजी के 10 स्वरूपों की साधना का विशेष महत्व बताया गया है। इस क्रम में गणाधिप, उमापुत्र, अघनाशन, विनायक, ईशपुत्र, सर्वसिद्धिप्रदायक, एकदंत, इभवक्र, मूषकवाहन और कुमारगुरु नामों का स्मरण किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रतिदिन 21 दुर्वा और मोदक अर्पित कर इन नामों का उच्चारण करने से घर में अनुकूलता और सकारात्मकता आती है। श्रीगणेश का जन्म मध्याह्ना काल में हुआ था, इसीलिए मिट्टी की प्रतिमा की स्थापना एवं प्राण-प्रतिष्ठा मध्याह्न (दोपहर) के शुभ मुहूर्त में की जानी चाहिए।

चतुर्थी पर ब्रह्म योग में विराजेंगे गणेश

भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी पर पार्थिव गणेश की स्थापना का विधान है। धर्मशास्त्रीय मत अनुसार मध्याह्न का अभिजीत मुहूर्त गणेश स्थापना के लिए शुभ माना गया है। इस बार स्थापना के साथ ब्रह्म योग का संयोग रहेगा। ज्योतिषीय मान्यता में इस योग में की गई गणेश स्थापना को मनोवांछित फल देने वाली माना जाता है।

पर्व एवं पूजन मुहूर्त विवरण-हरतालिका तीज व्रत

सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु और कुंवारी कन्याएं सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए निराहार व निर्जला व्रत रखती हैं। प्रातःकाल और प्रदोष काल में शिव पार्वती पूजन का विशेष महत्व है

स्थापना विधि

स्थान शुद्धिकरणः ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) या पूर्व दिशा में चौकी बिछाकर उस पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं।

स्थापनाः मिट्टी के गणेश जी को अक्षत के पुंज पर स्थापित करें।

संकल्प: हाथ में जल व अक्षत लेकर व्रत व पूजन का संकल्प लें।

सामग्री अर्पणः श्रीगणेश को दूर्वा, मोदक, लड्‌डू, लाल पुष्प, सिंदूर, और जनेऊ अर्पित करें।

मान्यताः शास्त्रों में मिट्टी के(पार्थिव) गणेश जी की पूजा को सर्वोत्तम माना है, क्योंकि मिट्टी पृथ्वी तत्व का प्रतीक है। इसके विसर्जन से पर्यावरण को हानि नहीं पहुंचती

Updated on:
09 Sept 2026 11:59 am
Published on:
09 Sept 2026 11:59 am