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Pradosh Vrat : क्या आप भी हैं मांगलिग! मंगल दोष दूर कर सकता है शिवजी का यह व्रत

Pradosh Vrat 2026 : मंगल दोष दूर कर सकती है शिव पूजा, भौम प्रदोष के दिन हनुमानजी के मंदिर में दीपक जलाएं, हनुमानचालीसा का पाठ करें
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भारत

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deepak deewan

Sep 07, 2026

शिव अभिषेक से दूर हो सकता है मंगल दोष

शिव अभिषेक से दूर हो सकता है मंगल दोष : फोटो सोर्स : AI Grok

Pradosh Vrat : वैदिक ज्योतिष में मंगल को नवग्रहों के सेनापति का दर्जा दिया गया है। इसे क्रूर ग्रह माना गया है। कुंडली में मंगल की स्थिति अच्छी न हो तो जीवन में कई दिक्कतें आती हैं। विवाह में विलंब होता है और दांपत्य जीवन में भी बार-बार विवाद होते हैं। पति पत्नी में अलगाव की नौबत आ जाती है। मंगल की अशुभता से कर्ज भी बढ़ता है। कुंडली के कुछ विशेष भावों में बैठे मंगल के कारण मांगलिक दोष बनता है। ऐसे लोगों को गुस्सा भी ज्यादा आता है। मांगलिक या मंगली होने अथवा अशुभ मंगल से उत्पन्न समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए मंगलदेव का आशीर्वाद प्राप्त करना जरूरी है। इसके लिए मंगलदेव के बीज मंत्रों का जाप करना चाहिए या हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। मंगल को प्रसन्न करने के लिए शिव पार्वती की पूजा करना भी सबसे अच्छा उपाय है।

ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई के अनुसार जिस जातक की कुंडली के प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में मंगल होता है उसे मांगलिक या मंगली कहा जाता है। ऐसे लोगों के जीवन में विवाह और दांपत्य संबंधी कई दिक्कतें आती है। मांगलिक लोगों की शादी में सामान्यतः विलंब होता है। विवाह के बाद दांपत्य जीवन में भी कई बार विवाद होते हैं। मंगली या मांगलिक लोग प्राय: कर्ज से परेशान रहते हैं। ऐसे लोग बैंक लोन भी नहीं चुका नहीं पाते।

मंगल ग्रह को मंगलवार का दिन समर्पित किया गया है। कुंडली में मंगल के अशुभ प्रभाव के कारण आ रहीं दिक्कतें दूर करने के लिए इस दिन मंगल ग्रह के बीज मंत्रों का जाप करना चाहिए। ज्योतिषाचार्य पंडित अरुण बुचके बताते हैं कि मंगल देव के बीज मंत्र- ओम क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः के 10 हजार जाप 40 दिनों में पूरे करने का विधान है। शुक्ल पक्ष के किसी भी मंगलवार से मंगलदेव के जाप शुरू कर सकते हैं। बीज मंत्रों का पूर्ण मनोयोग और निष्ठापूर्वक जाप करने से धीरे-धीरे मंगलदेव की प्रसन्नता से मांगलिक दोष से आनेवाली समस्याओं से छुटकारा मिल जाएगा।

मंगलदोष से मुक्ति पाने या इसका असर कम करने का एक सबसे अच्छा मौका आ रहा है। 8 सितंबर को त्रयोदशी तिथि है जिस दिन प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस बार मंगलवार के दिन प्रदोष व्रत आ रहा जिससे इसका महत्व और ज्यादा हो गया है। इसे भौम प्रदोष कहा जाता है। इस दिन शिवजी के साथ मंगलदेव की पूजा अर्चना भी की जाती है।

इस दिन शिव पूजा से मंगल का दोष भी दूर होता है

त्रयोदशी तिथि पर भौम प्रदोष व्रत रखकर प्रदोष काल में भगवान शिव की आराधना करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। शिवजी की प्रसन्नता से जीवन के सभी सुखों की प्राप्ति होती है। विशेष बात यह है कि इस दिन शिव पूजा से मंगल का दोष भी दूर होता है। मांगलिक दोष दूर करने के लिए भौम प्रदोष पर व्रत रखकर शिवजी के साथ मंगलदेव और हनुमानजी की पूजा भी करनी चाहिए। मंगलदेव से अपनी समस्याएं समाप्त करने की प्रार्थना करना चाहिए।

8 सितंबर को मंगलवार का दिन है इसलिए यह भौम प्रदोष होगा

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 8 सितंबर को दोपहर 2:42 बजे प्रारंभ होगी। 9 सितंबर को दोपहर 12:30 बजे इसका समापन होगा। उदया तिथि के अनुसार त्रयोदशी तिथि 9 सितंबर को पड़ेगी, लेकिन प्रदोष व्रत में प्रदोष काल का महत्व है। यह 8 सितंबर को पड़ेगा। ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर के मुताबिक प्रदोष काल के कारण इसी दिन प्रदोष व्रत करना शुभ होगा। 8 सितंबर को मंगलवार का दिन है इसलिए यह भौम प्रदोष होगा।