
Dhanteras : मां महालक्ष्मी के स्वागत के लिए तैयारी पूरी हो चुकी है। शुक्रवार को धन तेरस के साथ दीपोत्सव का आगाज हो चुका है। धनतेरस पर खरीदारी और आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि की पूजा से शुरू होने वाला उत्सव महालक्ष्मी पूजन, गोवर्धन पूजा और भाई-बहन के स्नेह के पर्व भाईदूज तक उल्लास बिखेरेगा। धनतेरस का दिन खरीदी के लिए बहुत शुभ माना जाता है, अन्य कई योगों ने इसकी शुभता में इजाफा कर दिया है। धर्माचार्य और ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि आज के शुभ मुहूर्त में बर्तन और सोने चांदी के आभूषण खरीदना सबसे उत्तम रहेगा।
दिवाली के चलते घरों में जहां पकवान बन रहे हैं तो बाजारों में ग्राहकों की जबर्दस्त आवाजाही है। कहीं दीपों और रंगोली के रंग आकर्षित कर रहे हैं तो कहीं सजावटी झालरें, बंदनवार, पूजन सामग्री, मिठाइयां और उपहारों की दुकानें सजी हुई हैं।
ब्रह्मशक्ति ज्योतिष संस्थान के पं. जगदीश शर्मा का कहना है कि धन तेरस का दिन साल भर में खरीदारी के शुभ माना जाता है। यह दिन सभी प्रकार की खरीदी के लिए विशेष शुभ माना जाता है। इसके साथ ही इस दिन तिथि, नक्षत्र के हिसाब से भी कई शुभ योग विद्यमान रहेंगे, जो इस दिन को और शुभता प्रदान करेंगे।
शुक्रवार का दिन सुख समृद्धि का दिन माना जाता है, साथ ही इस दिन हस्त नक्षत्र रहेगा। प्रीति और मालव्य योग का संयोग भी विशेष लाभकारी होगा। यह धन, वैभव, सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य की दृष्टि से विशेष शुभ माना जाता है।
धनतेरस को वैसे भी वर्षभर के प्रमुख स्वयंसिद्ध खरीदारी मुहूर्तों में स्थान प्राप्त है। इस दिन सोना-चांदी के आभूषण, भूमि, भवन, वाहन, बर्तन, इलेक्ट्रानिक आइटम सहित वस्तुओं की खरीदारी करना शुभ फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि शुभ योगों में की गई खरीदारी और विधि-विधान से किया गया पूजन घर में सुख-समृद्धि लेकर आता है।
चौघडिय़ा के अनुसार समय - प्रात: 06.35 मि. से 10.44 मि. तक क्रमश: चंचल लाभ व अमृत के चौघडिय़ा रहेंगे एवं दोप. 04.17 मि. से सांय: 05.40 मि. तक चंचल का चौघडिय़ा रहेगा।
आज के मुहूर्त - अनुकूल समय में प्रदोषवेला में धनत्रयोदशी पर्व पर यमदीपदान करने के लिए शुभ मुहूर्त है।
व्रत/पर्व - प्रदोष व्रत। धनत्रयोदशी पर्व। धनतेरस। प्रदोषवेला मेेें यमदीपदान। श्रीधन्वंतरि जयंती। यम प्रीत्यर्थ दीपदान। कामेश्वरी जयंती।
त्रयोदशी में कामदेव की पूजा करने से मनुष्य उत्तम भार्या प्राप्त करता है तथा उसकी सभी कामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। दिशाशूल - पश्चिम दिशा में। (अगर हो सके तो आज के दिन पश्चिम दिशा में यात्रा को टालना चाहिए)।