
Bhadli Navmi Importance: भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि देवशयनी एकादशी से चातुर्मास की शुरुआत होती है। इसके बाद भगवान विष्णु के योग निद्रा में होने की वजह से अगले 4 महीने तक कोई भी मांगलिक काम नहीं किया जा सकता है। ऐसे में चातुर्मास शुरू होने से पहले शुभ काम करने का अंतिम दिन भड़ली नवमी तिथि को होता है। इस साल भड़ल्या नवमी 22 जुलाई को मनाई जाएगी। खास बात यह है कि देवशयनी एकादशी से पहले आने वाली यह तिथि इस सीजन के आखिरी शुभ अवसरों में शामिल है। वहीं, पिछले करीब 1 महीने से विवाह के कारक ग्रह देव गुरु बृहस्पति मिथुन राशि में अस्त चल रहे हैं।
गुरु अस्त होने वाली इस अवधि में अन्नप्राशन, निर्माण कार्य (यदि पहले से चल रहा हो), वाहन या गहनों की खरीदारी, घर की मरम्मत या रेनोवेशन तीर्थ यात्रा और पूजा पाठ, दान, व्रत, उपवास और धार्मिक अनुष्ठान करने की मनाही नहीं है। इस दौरान ये कार्य कर सकते हैं। ऐसे कार्यों में मुहूर्त, गुरु अस्त होने या चातुर्मास का कोई बंधन नहीं माना जाता है। इस दौरान अगर कोई व्यक्ति गया में अपने पितरों का श्राद्ध कर्म या तर्पण करना चाहे तो कर सकता है।
इस वर्ष नवंबर में केवल सात दिन और दिसंबर में सिर्फ पांच दिन विवाह मुहूर्त है। 15 दिसंबर 2026 से 14 जनवरी 2027 तक खरमास होने से विवाह नहीं हो सकेंगे। विवाह मुहूर्त 15 दिसंबर से चार फरवरी तक भी नहीं होंगे। शुक्र ग्रह के उदित होने के बाद पांच फरवरी से शुरुआत होगी।
भड़ली नवमी अबूझ या स्वयंसिद्ध मुहूर्त के रूप में मानी गई है। यानी इस दिन शुभ कार्यों के लिए मुहूर्त के विचार की जरूरत नहीं होती।
भड़ली नवमी तिथि स्वयंसिद्ध मुहूर्त है। इस तिथि पर शुभ कार्य करने के लिए ज्योतिष गणना की आवश्यकता नहीं पड़ती है। किसी भी समय जातक अपनी सुविधा के अनुसार शुभ कार्य कर सकते हैं। साथ ही शुभ कार्य का श्रीगणेश कर सकते हैं। इस तिथि पर शुभ कार्य करने से अक्षय तृतीया के समतुल्य फल प्राप्त होता है।
25 जुलाई को देवशयनी एकादशी है, जिससे चातुर्मास का प्रारंभ हो जाएगा। यह काल आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक चलेगा। चातुर्मास के दौरान सभी शुभ और मांगलिक कार्यों पर धार्मिक रूप से पूर्ण विराम लगा दिया जाता है। गुरु ग्रह के 12 अगस्त को उदय होने के बाद भी मांगलिक कार्य प्रारंभ नहीं होंगे, क्योंकि तब तक चातुर्मास शुरू हो चुका होगा। अगला प्रमुख शुभ समय 25 नवंबर को देवउठनी एकादशी के दिन आएगा।