
Anant Chaturdashi 2026: हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी का विशेष महत्व है। यह दिन गणपति बप्पा को समर्पित है। अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति जी का विसर्जन (Ganpati Visarjan rituals) किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विसर्जन करने से पहले बप्पा की पूजा-अर्चना करने से सभी विघ्न दूर होते हैं और कामों में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। अगर आपने भी अपने घर में गणपति बप्पा को विराजमान किया है, तो अनंत चतुर्दशी के दिन विसर्जन करने से पहले गणेश जी की विशेष पूजा जरूर करें।
यदि परिवार में जन्म या मृत्यु के कारण सूतक अथवा अशौच की स्थिति चल रही हो, तो गणेश प्रतिमा की स्थापना नहीं करनी चाहिए और यदि कर ली है, तो विर्सजन नहीं करना चाहिए। जिन लोगों पर अकाल मृत्यु का दोष बन है, उन्हें कभी भी गणपति विसर्जन नहीं करना चाहिए। हां, वे लोग घर में गणपति की स्थापना कर सकते हैं। मगर उन्हें विसृजित न करें।
उत्तर पूजा संकेत होता है कि अब बप्पा अपने आसन से प्रस्थान कर रहे हैं और विसर्जन के लिए आगे बढ़ रहे हैं। यानी मूर्ति को खिसकाना अपने आप में कोई सामान्य स्थान परिवर्तन नहीं माना जाता, बल्कि यह विदाई की शुरुआत का प्रतीकात्मक संकेत होता है। इसके बाद गणपति बप्पा को श्रद्धा के साथ विसर्जन स्थल तक ले जाया जाता है।
गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश के स्वागत से शुरू होकर उनके विसर्जन के साथ पूरा होता है। इस वर्ष इस दस दिवसीय उत्सव का समापन शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी के दिन किया जाएगा। हालांकि, कई घरों और स्थानों पर अपनी परंपरा के अनुसार डेढ़ दिन, तीन, पांच या सात दिन में भी गणपति विसर्जन किया जाता है। विसर्जन से पहले भगवान गणेश की उत्तर पूजा की जाती है। उत्तर पूजा परंपरा बप्पा को विदाई देने से पहले अपनाई जाती है। इसमें भगवान गणेश की विधिवत पूजा-अर्चना और आरती करने के बाद उनसे परिवार पर कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की जाती है। उत्तर पूजा करने के बाद गणपति की मूर्ति को स्थापित स्थान से थोड़ा आगे खिसकाने की परंपरा है। मूर्ति को खिसकाना अपने आप में कोई सामान्य स्थान परिवर्तन नहीं माना जाता, बल्कि यह विदाई की शुरुआत का प्रतीकात्मक संकेत होता है।