
Sawan Vrat Puja Vidhi: सावन की पावन बेला में भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा पाने का दुर्लभ अवसर कामिका एकादशी व्रत (Kamika Ekadashi 2026) आज है। धर्मशास्त्रों में इस एकादशी को पापों का नाश करने वाली, मन को पवित्र बनाने वाली और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करने वाली एकादशी बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक भगवान विष्णु का पूजन करने से अनेक यज्ञ, तीर्थ स्नान और गौदान के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।
ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली कामिका एकादशी चातुर्मास की पहली कृष्ण पक्ष की एकादशी है। इसका महत्व ब्रह्मवैवर्त पुराण और पद्म पुराण में विस्तार से वर्णित है। सूर्योदय के समय एकादशी तिथि रहेगी, इसलिए रविवार को व्रत किया जाएगा। व्रत का पारण सोमवार को सुबह 5.47 से 8 बजे तक किया जाएगा। एकादशी पर देशभर के विष्णु मंदिरों सहित खाटू श्याम मंदिरों में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचेंगे।
कामिका एकादशी का व्रत दशमी तिथि से ही सात्विक जीवन शैली अपनाकर शुरू करना चाहिए। एकादशी की सुबह स्नान कर पीले या स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी का विधिवत पूजन करें। भगवान को तुलसी दल, पीले पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें तथा "ऊं नमो भगवते वासुदेवाय" या "ऊं नमो नारायणाय मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार निर्जल, जल या फलाहार का व्रत रख सकते हैं। इस दिन विष्णु सहस्रनाम, गीता का पाठ और एकादशी व्रत कथा का श्रवण अत्यंत फलदायी माना गया है। रात्रि में भजन-कीर्तन और जागरण करने से व्रत का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार जो श्रद्धालु कामिका एकादशी का व्रत सच्ची श्रद्धा, संयम और भक्ति के साथ करता है, उसके जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं और श्रीहरि विष्णु की कृपा से जीवन में सुख, वैभव तथा अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए सावन की यह एकादशी केवल उपवास का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, भक्ति और ईश्वर से जुड़ने का दिव्य अवसर मानी गई है।
दान-पुण्य से पूर्ण होता है व्रत
कामिका एकादशी का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को द्वादशी तिथि में विधिपूर्वक पारण करने के बाद ब्राह्मण, गो अथवा जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा का दान अवश्य करना चाहिए। इससे भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, समृद्धि एवं शांति का वास होता है।