धर्म-कर्म

धन की कमी दूर कर सकतीं हैं 16 ऋचाएं, 23 अगस्त को एकादशी पर श्रद्धापूर्वक करें पाठ

Sri Sukta : 23 अगस्त को सावन शुक्ल एकादशी, विष्णुजी के साथ लक्ष्मीजी की पूजा का​ विधान, श्रीसूक्त पाठ से होता लाभ
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Aug 21, 2026
23 अगस्त को एकादशी
23 अगस्त को सावन एकादशी- photo source AI

Ekadashi : श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ मां लक्ष्मी की पूजा करने के साथ व्रत रखने का विधान है। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, पुत्रदा एकादशी व्रत से संतान सुख के साथ ही सुख-समृद्धि, धन-संपदा की प्राप्ति होती है। सावन शुक्ल एकादशी इस बार 23 अगस्त यानि रविवार को है। इस दिन श्रीसूक्त का पाठ अवश्य करना चाहिए। इससे जीवन में कभी धन की कमी नहीं होती।

माहात्म्य सहित सोलह ऋचाएं

ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर बताते हैं कि श्री-सूक्त में मुख्यत: पन्द्रह ऋचाएं हैं, माहात्म्य सहित सोलह ऋचाएं मानी गयी हैं। माहात्म्य का पाठ भी जरूरी है क्योंकि इसके बिना फल प्राप्ति नहीं होती। ऋग्वेद में श्री सूक्त का महत्व बताया गया है। एकादशी के दिन भगवान विष्णु और लक्ष्मी की विधिविधान से पूजा कर श्री सूक्त का पाठ करने से धनलाभ होता है।

।। अथ श्री-सूक्त मंत्र पाठ ।।

1- ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं, सुवर्णरजतस्त्रजाम् ।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं, जातवेदो म आ वह ।।

2- तां म आ वह जातवेदो, लक्ष्मीमनपगामिनीम् ।
यस्यां हिरण्यं विन्देयं, गामश्वं पुरूषानहम् ।।

3- अश्वपूर्वां रथमध्यां, हस्तिनादप्रमोदिनीम् ।
श्रियं देवीमुप ह्वये, श्रीर्मा देवी जुषताम् ।।

4- कां सोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम् ।
पद्मेस्थितां पद्मवर्णां तामिहोप ह्वये श्रियम् ।।

5- चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम् ।
तां पद्मिनीमीं शरणं प्र पद्ये अलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे ।।

6- आदित्यवर्णे तपसोऽधि जातो वनस्पतिस्तव वृक्षोऽक्ष बिल्वः ।
तस्य फलानि तपसा नुदन्तु या अन्तरा याश्च बाह्या अलक्ष्मीः ।।

7- उपैतु मां दैवसखः, कीर्तिश्च मणिना सह ।
प्रादुर्भूतोऽस्मि राष्ट्रेऽस्मिन्, कीर्तिमृद्धिं ददातु मे ।।

8- क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम् ।
अभूतिमसमृद्धिं च, सर्वां निर्णुद मे गृहात् ।।

9- गन्धद्वारां दुराधर्षां, नित्यपुष्टां करीषिणीम् ।
ईश्वरीं सर्वभूतानां, तामिहोप ह्वये श्रियम् ।।

10- मनसः काममाकूतिं, वाचः सत्यमशीमहि ।
पशूनां रूपमन्नस्य, मयि श्रीः श्रयतां यशः ।।

11- कर्दमेन प्रजा भूता मयि सम्भव कर्दम ।
श्रियं वासय मे कुले मातरं पद्ममालिनीम् ।।

12- आपः सृजन्तु स्निग्धानि चिक्लीत वस मे गृहे ।
नि च देवीं मातरं श्रियं वासय मे कुले ।।

13- आर्द्रां पुष्करिणीं पुष्टिं पिंगलां पद्ममालिनीम् ।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं, जातवेदो म आ वह ।।

14- आर्द्रां य करिणीं यष्टिं सुवर्णां हेममालिनीम् ।
सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आ वह ।।

15- तां म आ वह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम् ।
यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावो दास्योऽश्वान् विन्देयं पुरुषानहम् ।।

16- य: शुचि: प्रयतो भूत्वा जुहुयादाज्यमन्वहम् ।
सूक्तं पंचदशर्चं च श्रीकाम: सततं जपेत् ।।

।। इति समाप्ति ।।

Updated on:
21 Aug 2026 02:09 pm
Published on:
21 Aug 2026 02:07 pm