
Sawan Special: नर्मदा के तट पर राजा कुश ने की थी कुशावर्तेश्वर महादेव की स्थापना (फोटो सोर्स -Patrika)
Kushavarteeshwar Mahadev: सावन (Sawan) में नर्मदा तट के इस प्राचीन धाम का माहौल देखते ही बनता है। हजारों साल पुरानी मान्यता, रहस्यमयी परंपराएं और कल्चुरीकालीन स्थापत्य इसे खास बनाते हैं। यहां पहुंचते ही श्रद्धालुओं को ऐसा आध्यात्मिक अनुभव मिलता है, जिसकी चर्चा दूर-दूर तक होती है। मां नर्मदा के पावन तट पर स्थित जिलहरी घाट का कुशावर्तेश्वर महादेव मंदिर पौराणिक आस्था, तंत्र साधना और प्राचीन स्थापत्य का अनूठा संगम है। करीब एक हजार वर्ष से अधिक पुराने इस मंदिर की संरचना आज भी मजबूत है।
सावन में यहां महाकाल की तर्ज पर प्रतिदिन भस्म पुष्प और मेवों लेपनान कष्य और किषक जानका है। भोर की आरती से शाम तक हर-हर महादेव और नर्मदे हर के जयकारे गूंजते हैं। स्वामी गिरिजानन्द सरस्वती के अनुसार, पौराणिक ग्रंथों और जनश्रुतियों में मंदिर का उल्लेख मिलता है। त्रेतायुग में भगवान श्रीराम के पुत्र राजा कुश ने जबलपुर के नर्मदा तट पर वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। इसी दौरान उन्होंने यहां स्वयं शिवलिंग की स्थापना की। राजा कुश के नाम पर ही नाम कुशावर्तेश्वर महादेव पड़ा।
इतिहासकार डॉ. आनंद सिंह राणा के अनुसार कुशावर्तेश्वर महादेव मंदिर नर्मदा के उत्तरी तट के प्राचीनतम मंदिरो में माना जाता है। मंदिर की शिल्पकला और पत्थरों की नक्काशी में कल्चुरीकालीन स्थापत्य की स्पष्ट झलक मिलती है। शताब्दियों बाद भी मजबूती कायम प्राकृतिक थपेड़ों और नर्मदा के प्रवाह के बावजूद मंदिर की संरचना में आज तक कोई बड़ी दरार या टूट-फूट नहीं हुई है। गर्भगृह और शिखर आज भी मजबूत और आकर्षक नजर आते हैं।
पुजारी और स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, यह स्वयंसिद्ध पीठ है। प्राचीन समय में यहां गहरा कुंड था, जिसके भीतर शिवलिंग के नीचे प्राकृतिक जिलहरी स्थित थी। इसी के कारण क्षेत्र का नाम जिलहरी घाट पड़ा। बाद में कुंड को सुरक्षित ढंककर उसी स्थान पर वर्तमान मंदिर का निर्माण कराया गया।
मंदिर तंत्र साधना के लिए भी प्रसिद्ध है। देशभर से साधक और अघोरी यहां साधना के लिए पहुंचते हैं। नर्मदा का शांत और विहंगम दृश्य श्रद्धालुओं को मानसिक शांति देता है। नर्मदा परिक्रमावासियो के लिए मंदिर समिति की ओर से ठहरने, विश्राम और भोजन बनाने की निःशुल्क व्यवस्था भी की जाती है।
Updated on:
20 Aug 2026 02:52 pm
Published on:
20 Aug 2026 02:52 pm
