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नवरात्रि में ग्रहों का दुर्लभ संयोग, तीन दिन सर्वार्थ सिद्धि और एक दिन अमृत सिद्धि योग

Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्र 2026 में गजकेसरी योग, चित्रा नक्षत्र और कई शुभ संयोग बन रहे हैं। जानिए कलश स्थापना की तारीख, माता रानी का आगमन और शुभ कार्यों के महत्व।
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Oct 10, 2026
shardiya navratri 2026 Sarvartha Siddhi yog Amrit Siddhi Yog
Shardiya Navratri 2026: नवरात्रि में तीन दिन सर्वार्थ सिद्धि और एक दिन अमृत सिद्धि योग (फोटो सोर्स- Patrika)

Shardiya Navratri 2026 shubh yog: शक्ति की आराधना का महापर्व शारदीय नवरात्र इस बार शुभयोगों और धार्मिक उल्लास के बीच शुरू होगा। 11 अक्टूबर से मां दुर्गा की आराधना का सिलसिला शुरू होकर 20 अक्टूबर को नवमी तक चलेगा। इसी दिन विजयादशमी का पर्व भी मनाया जाएगा। खास बात यह है कि इस बार नवरात्र में गजकेसरी योग और चित्रा नक्षत्र का संयोग बन रहा है। मान्यता है कि हाथी पर सवार होकर आने वाली मां दुर्गा सुख-समृद्धि, वैभव और ऐश्वर्य का आशीर्वाद देती है। सप्तमी तिथि की वृद्धि के साथ नवमी और दशहरा का संयोग भी इस पर्व को खास बना रहा है।

बन रहे ये योग

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, चंद्रमा और गुरु के केंद्र में होने से गजकेसरी योग बनेगा। वहीं, नवरात्र के दौरान तीन दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और एक दिन अमृत सिद्धि योग भी रहेगा। आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 9.19 बजे शुरू होकर 11 अक्टूबर की रात 9.30 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के मान से 11 अक्टूबर को प्रथम नवरात्र मनाया जाएगा।

नवरात्र के साथ शुभ कार्यों का भी श्रीगणेश

नवरात्र के पावन दिनों में पूजा-अर्चना के साथ गृह प्रवेश, जमीन-मकान और वाहन की खरीदारी, इलेक्ट्रॉनिक सामान की खरीदी तथा नए कारोबार की शुरुआत जैसे शुभ कार्य भी गति पकड़ेगे। कई परिवार मुहूर्त के अनुसार पहले से तैयारियों में जुटे हैं। त्योहारों के इस दौर में धार्मिक आस्था के साथ बाजार में भी रौनक बढ़ने और कारोबार को नई गति मिलने की उम्मीद है।

गज केसरी योग क्या है?

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, गजकेसरी योग सबसे शुभ और शक्तिशाली योगों में से एक माना जाता है। 'गज' का अर्थ हाथी और 'केसरी' का अर्थ सिंह होता है। मान्यता के अनुसार, इस योग के प्रभाव से व्यक्ति आर्थिक रूप से मजबूत होता है और उसके जीवन की कई बाधाएं दूर होती हैं।

नवरात्रि पर दिन गज केसरी योग बनने का महत्व

यदि किसी शुभ मुहूर्त या पर्व के दौरान गजकेसरी योग बनता है, तो यह कई नकारात्मक योगों और विघ्नों के प्रभाव को कम कर देता है। इस दौरान देवगुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि (कर्क) में शुभ फल देते हैं और माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। नवरात्रि में इस योग के बनने से धन वृष्टि, व्यापार में लाभ और सुख-समृद्धि के योग तीव्र हो जाते हैं।

Updated on:
10 Oct 2026 12:23 pm
Published on:
10 Oct 2026 12:23 pm