
Agra-Gwalior Green Field Expressway : धौलपुर जिले से गुजरने वाला बहु प्रतीक्षित आगरा-ग्वालियर ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे में जमीन को लेकर फंसा पेच समाप्त हो गया। जिले के किसानों को भूमि अधिग्रहण के बदले अब पहले से अधिक मुआवजा राशि मिल रही है। प्रदेश में डीएलसी रेट कम होने से जिले के किसानों को पड़ोसी उत्तरप्रदेश के आगरा जिले के किसानों के मुकाबले कम मुआवजा था, जिसके चलते काफी समय तक पेच फंसा रहा।
लेकिन एनएचएआई, निर्माणकर्ता कंपनी और जिला प्रशासन ने मुआवजा के पेच को लेकर कई दौर की चर्चा हुई, जिस पर जिले के किसानों को पहले से अधिक मुआवजा देने पर सहमति बन गई। उक्त प्रोजेक्ट में जिन किसानों की जमीन आ रही थी, उन्हें अधिग्रहण के बदले करीब 46 करोड़ रुपए का मुआवजा राशि दिया जा रहा है। खास बात ये है कि उक्त ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे बीओटी प्रोजेक्ट (बिल्ड ऑपरेट ट्रांसफर) है। उक्त कंपनी ही अब एनएच 44 (मुंबई-दिल्ली हाइवे) पर भी कार्य संभालेगी। यानी आगे इस हाइवे पर टोल वसूली उक्त कंपनी ही करेगी।
ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे तीन राज्य उत्तरप्रदेश, राजस्थान और मध्यप्रदेश से होकर निकल रहा है. जिसकी कुल लम्बाई करीब 88 किमी होगी। यह 6-लेन एक्सप्रेस-वे होगा, जिससे आगामी समय में आगरा-ग्वालियर के बीच आवागमन और आसान होगा और यह सफर मात्र डेढ़ घंटे में पूर्ण होगा। जबकि अभी आगरा तक पहुंचने में करीब 3 घंटे का समय सामान्य तौर पर लग रहा है। जानकारी के अनुसार इस सुविधा के बाद स्थानीय एवं बाहर से आने वाले राहगीरों को और राहत मिल सकेगी।
ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे हाइवे के लिए आगरा जिले में जमीन अधिग्रहण कार्य पूर्ण होने पर एनएचएआई ने धौलपुर जिले में शुरुआत की तो किसान कम भाव मिलता देख नाराज हो गए। इसकी वजह थी कि पड़ोसी आगरा जिले में प्रति बीघा करीब 18 लाख रुपए का भाव था। जबकि राजस्थान में DSC रेट कम होने से भाव करीब 5 लाख रुपए प्रति बीघा था। उक्त भाव में जमीन-आसान का अंतर होने से किसानों ने जमीन देने से इनकार दिया था। प्रशासन ने समझाइश की लेकिन बात नहीं बनी। पेच फंसता देख जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने NHAI प्रशासन से वार्ता की। वार्ता में कहा कि कम भाव में जमीन अधिग्रहण मामला लटक सकता है।
जिला प्रशासन के साथ जनप्रतिनिधियों ने भी मोर्चा संभाला। सरकार तक बात पहुंचाई गई। इसके बाद फिर से एनएचएआई और प्रशासन में वार्ता हुई। जिसमें 3 स्तर पर भूमि के मुआवजे में वृद्धि हुई। इलाके में बेहतर किस्म की कृषि की भूमि पर करीब 1.52 फीसदी से 2 बार वृद्धि हुई। इसी तरह दूसरी और तीसरी किस्म की भूमि पर भी मुआवजा राशि बढ़ी। आखिर में करीब कुल 23 सीआर भूमि का लगभग 46 करोड़ रुपए की मुआवजा राशि बनी। बता दें कि क्षेत्र में मार्केट रेट से सर्किल रेट कम थे, जिससे पेच फंस रहा था। फिर वार्ता के जरिए समाधान निकला।
एनएच 44 पर के रख-रखाव और अन्य कार्यों की जिम्मेदारी अब ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे निर्माण कर रही कंपनी पर रहेगा। यह बीओटी प्रोजेक्ट होता है। इसी के तहत कंपनी ने धौलपुर शहर में सर्विस लेन की मरम्मत कार्य शुरू कर दिया है। अब आगे उक्त कंपनी यूपी के सैया में लगे टोल का भी कार्य संभालेगी। इसमें एनएचएआई को 17 फीसदी राशि देनी होगी। बीओटी एक तरह से सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल है। सरकार किसी कंपनी को निश्चित समय के लिए बंदरगाह, पुल और सड़क निर्माण जैसी बड़ी परियोजनाओं में निवेश, निर्माण और संचालन का अधिकार देती है। वहीं, अनुबंध की समय सीमा पूर्ण होने पर उक्त संपत्ति वापस सरकार को सौंप दी जाती है।
ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे बना रही कंपनी ही अब धौलपुर से गुजर रहे एनएच-44 का ख्याल रखेगी। बीओटी प्रोजेक्ट के तहत कंपनी ने शहर में खस्ताहाल सर्विस लेन के हालात सुधारने के लिए कार्य एक फर्म को सौंप दिया है। शहर में राजाखेड़ा बाइपास और आगरा की तरफ सर्विस लेन की हालत खराब है। इसी तरह सागरपाडा की तरफ भी स्थिति खास अच्छी नहीं है। यहां सर्विस लेन से गुजरना एक तरह की सजा है।
आगरा-ग्वालियर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे धौलपुर जिले में राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में होकर निकलेगा। यह क्षेत्र बीहड़ और चंबल नदी किनारे का क्षेत्र है। इसके चलते चंबल नदी और घाटों पर आवासरत घडियाल, मगरमच्छ, कछुआ समेत अन्य वन्यजीवों के संरक्षण का भी ध्यान रखा गया है। चंबल नदी पर एक केबल-स्टे ब्रिज का निर्माण होगा। इस पुल पर ध्वनि और प्रकाश अवरोधक जैसी अन्य वन्यजीव संरक्षण व्यवस्थाएं भी लागू की जाएंगी। चंबल अभयारण्य क्षेत्र में आगरा जिला भी जुड़ा है। धौलपुर के क्षेत्र में डीएफओ वन्यजीव की टीम निगरानी रखती है। यहां हाल में बजरी खनन बंद होने पर अब वन्यजीव आसानी से नजर आ जाएंगे।
ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे के लिए अधिकतर भूमि जिले के राजाखेड़ा उपखंड में थी। जमीन अधिग्रहण तय समय पर नहीं होने पर एनएचएआई पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता था। उक्त प्रोजेक्ट के लिए तय समय में भूमि अधिग्रहण कर कंपनी को देनी थी। देरी होने पर एनएचएआई को भारी भरकम जुर्माना देना पड़ सकता था। जब किसान अड़ गए तो एनएचएआई प्रशासन के मुश्किलें बढ़ गई। जिस पर एनएचएआई और प्रशासन के बीच वार्ता हुई, जिस पर डीएलसी रेट से अलग रास्ता अपनाते हुए मुआवजा राशि को बढ़ाया गया।
आगरा-ग्वालियर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के लिए जमीन अधिग्रहण का कार्य पूर्ण हो गया है। पहले किसानों को कम मुआवजा मिल रहा था, जिस पर एनएचएआई से वार्ता कर जमीन अधिग्रहण के बदले मुआवजा राशि में वृद्धि की गई है। मुआवजा राशि वितरण कार्य शुरू हो गया है। यह एक्सप्रेस-वे जिले के बीहड़ क्षेत्र भविष्य में विकसित करने में अपनी भूमिका निभाएगा।
श्रीनिधि बी टी, जिला कलक्टर