धौलपुर

Mustard Oil Price: खाड़ी संकट से महंगाई की नई मार, 1 किलो सरसों तेल के दाम में बड़ा उछाल, जानिए कीमत

Dholpur Mustard Oil Price: धौलपुर में सरसों तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। करीब 20 दिनों में 1 किलो सरसों तेल 170 रुपए तक पहुंच गया, जिससे उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ गई है।

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Apr 07, 2026
सरसों तेल। फाइल फोटो- पत्रिका

धौलपुर। पेट्रोलियम पदार्थ और एलपीजी गैस के बाद अब मध्य-पूर्व एशिया में छिड़ी जंग का असर भारतीय बाजार में खाद्य तेलों पर भी दिखाई देने लगा है। करीब 20 दिनों में सरसों तेल के दामों में 20 से 25 रुपए तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

वर्तमान में बाजार में सरसों तेल करीब 170 रुपए प्रति किलो बिक रहा है। इस तेजी की बड़ी वजह खाड़ी देशों में युद्ध के कारण खाद्य तेलों के आयात पर पड़ा असर माना जा रहा है। साथ ही, स्थानीय बाजार में सरसों की आवक भी प्रभावित हुई है, जिससे आपूर्ति कम हो गई है और दाम लगातार बढ़ रहे हैं।

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इसी तरह सोया रिफाइंड तेल के दामों में भी उछाल आया है। खाद्य तेलों की कीमतों में बढ़ोतरी से आम आदमी की रसोई का बजट बिगड़ गया है। बढ़ते दामों को देखते हुए अब लोग जल्दबाजी में सरसों तेल की खरीद कर रहे हैं। आमतौर पर उत्तर भारत में नई फसल आने के बाद लोग सालभर का तेल एक साथ खरीदते हैं, लेकिन इस बार दाम गिरने की उम्मीद में इंतजार करना लोगों पर भारी पड़ गया। दाम कम होने के बजाय तेजी से बढ़ गए, जिससे उपभोक्ताओं में मायूसी देखी जा रही है।

15 किलो टिन खरीद पर कुछ कम

थोक बाजार में सोमवार को सरसों तेल का भाव 170 रुपए प्रति लीटर के आसपास बना रहा। हालांकि 15 किलो के टिन या अधिक मात्रा में खरीद करने पर दुकानदार कुछ राहत दे देते हैं, लेकिन एक लीटर की खरीद पर कोई छूट नहीं मिल रही है। करीब 20 दिन पहले यही तेल 145 से 150 रुपए प्रति किलो के बीच बिक रहा था। वहीं कृषि उपज मंडी में सोमवार को सरसों का भाव करीब 7060 रुपए प्रति क्विंटल दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम समर्थन मूल्य इससे कम है।

बारिश से फसल को पहुंचा नुकसान

जिले में इस बार गेहूं का रकबा 60 हजार हेक्टेयर, सरसों का 80 हजार हेक्टेयर और चना का रकबा करीब एक हजार हेक्टेयर रहा। मार्च माह के दूसरे और तीसरे सप्ताह तक सरसों की 60 से 70 प्रतिशत फसल कट चुकी थी और गेहूं की फसल कटाई के लिए तैयार थी, लेकिन गत माह और इस सप्ताह खराब मौसम और बारिश के कारण खेतों में कटी पड़ी सरसों की फसल को नुकसान पहुंचा है। बारिश से दाना गीला हो गया, जिससे गुणवत्ता और उत्पादन दोनों प्रभावित हुए हैं।

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Published on:
07 Apr 2026 03:48 pm
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