धौलपुर

Dholpur Mandi Bhav: खाद्य तेलों में अचानक आई तेजी, सरसों के भाव में आया जबरदस्त उछाल, जानें 1 लीटर तेल की कीमत

Sarso Mandi Bhav: खाद्य तेलों के आयात पर असर पड़ने से सरसों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। धौलपुर मंडी में सरसों 7690 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है, जबकि सरसों तेल भी महंगा हो गया है।

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May 23, 2026
फाइल फोटो- पत्रिका

धौलपुर। सरसों के दामों में पिछले करीब बीस दिनों से लगातार तेजी देखने को मिल रही है। खाड़ी देशों में बदले हालात के कारण खाद्य तेलों की सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिसका असर अब देश के बाजारों में भी दिखाई देने लगा है। खाद्य तेलों के आयात में कमी आने से सरसों तेल की मांग तेजी से बढ़ी है और इसका सीधा असर मंडियों में सरसों के भाव पर पड़ा है।

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शनिवार को धौलपुर कृषि उपज मंडी में सरसों के भाव बढ़कर 7690 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गए। जबकि कुछ दिन पहले तक मंडी में सरसों का भाव 7300 से 7500 रुपए प्रति क्विंटल के बीच बना हुआ था। वहीं बाजार में खुले खुदरा भाव में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अब एक लीटर सरसों का तेल करीब 180 से 190 रुपए के बीच बिक रहा है। अलग-अलग ब्रांड के अनुसार कीमतों में अंतर देखा जा रहा है, जबकि इस बार सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य 6200 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया था।

बाजार में मांग बढ़ने से पड़ा असर

खाड़ी देशों में बदले हालात का असर देश के खाद्य तेल बाजार पर भी पड़ रहा है। बाहर से पॉम ऑयल समेत अन्य खाद्य तेलों का आयात कम हो गया है। पहले आयात होने वाले तेलों के कारण सरसों तेल के दाम नियंत्रित रहते थे, लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के चलते सरसों तेल के भाव तेजी से बढ़ रहे हैं। अप्रेल माह में फसल कटाई के समय सरसों तेल का भाव 135 से 140 रुपए प्रति लीटर के बीच था, जो अब बढ़कर 180 से 190 रुपए तक पहुंच गया है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सरसों उत्पादक देश है और यहां से विदेशों में भी निर्यात होता है। हालांकि, घरेलू मांग बढ़ने से बाजार पर दबाव बढ़ गया है।

किचन में भी हिसाब बिगड़ने की आशंका

उत्तर भारत के राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, दिल्ली और पंजाब जैसे राज्यों में सरसों तेल का सबसे अधिक उपयोग किया जाता है। ऐसे में तेल के बढ़ते दाम आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ सकते हैं। जिन लोगों ने अप्रेल में पहले ही तेल खरीदकर रख लिया था, उन्हें फिलहाल राहत मिल सकती है, लेकिन गरीब और मध्यम वर्ग पर इसका असर साफ दिखाई देने लगा है।

बाजार में खुले तेल के दाम लगभग रोज बदल रहे हैं। वहीं होटल और रेस्टोरेंट कारोबार पर भी इसका असर पड़ सकता है। खाद्य तेल महंगा होने से खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। पूर्वी राजस्थान में सरसों की फसल का बड़े स्तर पर उत्पादन होता है और यहां के किसान भी बढ़ते भाव पर नजर बनाए हुए हैं।

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