Dholpur Tourism Hub: पर्यटन के क्षेत्र में राजस्थान की पहचान देश-विदेश तक है। इसी पहचान को बढ़ावा देने के लिए धौलपुर जिले में पर्यटन स्थलों को विकसित करने के लिए प्रयास शुरू किए हैं।
Chambal Bihad Tourist Hub: धौलपुर। पर्यटन के क्षेत्र में राजस्थान की पहचान देश-विदेश तक है। इसी पहचान को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन की ओर से धौलपुर जिले में पर्यटन स्थलों को विकसित करने के लिए प्रयास शुरू किए हैं। पूर्वी राजस्थान के चंबल नदी किनारे बसे धौलपुर जिले में पर्यटन की अपार संभावनाओं को देखते हुए हाल के दिनों में कुछ प्रस्ताव राज्य सरकार को भिजवाएं हैं। इसमें विख्यात चंबल बीहड़ों में पर्यटन गतिविधियां को बढ़ावा देने और शहर से सटे कुछ इलाके को विकसित करने के उद्देश्य से प्रस्ताव शामिल हैं। इसमें पर्यटन गतिविधियों को लेकर एक खासा खींचा है। हालांकि, अभी यह शुरुआत दौर में है।
लेकिन माना जा रहा है कि चंबल नदी से लगे बीहड़ में ट्रेकिंग, बीहड़ नाइट्स और लोक संगीत कार्यक्रमों के जरिए पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है। इसमें ऐतिहासिक शेरगढ़ किला, मचकुंड सरोवर, चोपड़ा मंदिर, वन विहार, तालाबशाही समेत अन्य ऐतिहासिक धरोहरों को शामिल करते हुए एक पैकेज के तौर पर्यटकों को भ्रमण कराया जा सकता है। पर्यटन गतिविधियों से स्थानीय स्तर पर युवाओं को रोजगार भी मिल सकेगा। इधर, जिले के पर्यटन केन्द्रों का प्रचार प्रसार को लेकर हाल में एक कैलेंडर भी जारी किया है। जिसमें पर्यटन स्थलों सचित्र दिखाया है।
शहर से चंबल किनारे बीहड़ में ट्रेक बनाने की योजना है। जंगल सफारी और ट्रेकिंग के शौकीन पर्यटकों को ध्यान में रखते हुए इस योजना पर अभी शुरुआती दौर कार्य चल रहा है। वर्तमान में शेरगढ़ किले की तरफ जा रहे पक्का होने से लोगों की आवाजाही पहले से बढ़ी है। इसी रास्ते पर आगे की तरफ और किले के नीचे की तरफ एक ट्रेक तैयार करने की योजना है। जहां पर पर्यटक आसानी से भ्रमण करने के साथ बीहड़ों को लुत्फ उठा सकेंगे। साथ ही चंबल सफारी का भी आनंद ले पाएंगे। इस सीजन में नगर परिषद की ओर से चंबल में बोटिंग शुरू की गई। बीहड़ क्षेत्र में पर्यटकों के लिहाज से विकसित करने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
धौलपुर-मुरैना क्षेत्र के बीहड़ देशभर में सबसे खतरनाक बीहड़ों में शुमार है। यह इलाका पूरी तरह से भूलभुलैया है। एक दफा बीहड़ में अंदर घुस गए तो आपको रास्ता खोजना मुश्किल हो सकता है। बीहड़ में कई तरफ छोटे-छोटे रास्ते जाते है जो भ्रम की स्थिति बनाते हैं। कंटीले झांडियों से लदे टीलों पर चढ़ना भी मुश्किल रहता है। ऊपरी भाग से भी पूरी जगह एक जैसी नजर आती है। हालांकि, अब जिले के राजाखेड़ा और धौलपुर उपखंड क्षेत्र के कुछ इलाकों में बीहड़ क्षेत्र में कुछ जगह सड़कों का निर्माण होने से ग्रामीणों के लिए आवाजाही आसानी हुई है।
-मचकुंड सरोवर
-चंबल सफारी
-चंबल किनारे शेरगढ़ किला
-वन विहार वन्यजीव अभयारण्य
-तालाब ए शाही
-रामसागर अभयारण्य
-चोपड़ा और सैंपऊ महादेव मंदिर
-पुरानी छावनी श्रीराम जानकी व हनुमान मंदिर
चंबल राजस्थान के बारां, कोटा, सवाई माधोपुर, करौली और धौलपुर जिलों से होकर निकलती है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद, इटावा, औरेया और जालौन जिलों के कुछ हिस्सों और मध्य प्रदेश के ग्वालियर, भिंड, मुरैना और श्योपुर जिले को कवर करती है। यह क्षेत्र लगभग पांच लाख हेक्टेयर बंजर भूमि से ढका हुआ है। यह मध्य विध्य पठार के उत्तर. पश्चिमी भाग और अरावली पर्वतमाला के दक्षिण-पूर्वी भाग से होकर बहती है।
चंबल घाटी की ऊबड़-खाबड़ जमीन ने काफी समय से बॉलीवुड के डायेक्टरों को खासा लुभाया है। ख्यातनाम फिल्म बैंडिट क्वीन समेत कई फिल्म यहां पर फिल्माई गई है। साथ ही चंबल मलखान सिंह, मान सिंह, फूलनदेवी, पानी सिंह तोमर समेत कई दस्युओं के लिए शरण स्थली भी रही है। काफी समय तक बीहड़ में दस्युओं को बोलबाला रह चुका है। हालांकि, अब यह पुरानी बातें हो चुकी है।
धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व सेंचुरी आने वाले दिनों में जिले की तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण किरदार निभाएगी। वाइल्ड लाइफ के शौकीनों को एक नई साइट्स मिलेगी। हालांकि, अभी सेंचुरी को शुरु होने में कुछ समय लग सकता है। सेंचुरी में ट्रेकिंग एरिया, पर्यटक भ्रमण क्षेत्र और अन्य सुविधाएं अभी होना शेष हैं। धौलपुर सेंचुरी आने वाले समय में दिल्ली, मथुरा, आगरा और एमपी के क्षेत्रीय लोगों को आकर्षित करेगी। वर्तमान में ज्यादातर सवाईमाधोपुर के रणथम्भौर या फिर सरिस्का सेंचुरी में भ्रमण करने पहुंचते हैं। बाद में धौलपुर सेंचुरी पर्यटकों को लुभाएगी। इसकी वजह से वजह यह दिल्ली और आगरा के नजदीक होना है। इस क्षेत्र में सर्वाधिक पर्यटक आते हैं।
चंबल बीहड़ में ट्रेकिंग समेत अन्य पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेज रखा है। शहर से लगे चंबल बीहड़ पर्यटन के लिहाज से खूबसूरत साइट है।
-वी. चेतन कुमार, डीएफओ धौलपुर